बांदा-चित्रकूट के धार्मिक स्थलों का जल व रज भेजा अयोध्या

भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में प्रस्तावित मन्दिर के शिलान्यास के लिए विभिन्न धार्मिक स्थलों का जल व रज अयोध्या पहुंचाई जा रही है..

बांदा-चित्रकूट के धार्मिक स्थलों का जल व रज भेजा अयोध्या
बांदा-चित्रकूट के धार्मिक स्थलों का जल व रज भेजा अयोध्या

इसी क्रम में विश्व हिन्दू परिषद, बजरंग दल, मातृ शक्ति, दुर्गा वाहिनी के पदाधिकारियों ने बांदा व चित्रकूट के पवित्र स्थानों से जल व रज एकत्र कर अयोध्या भेजा है।

इन हिन्दू संगठनों के पदाधिकारियों ने पवित्र धार्मिक स्थल वामदेवेश्वर मन्दिर का जल व रज, केन नदी का जल, कालिंजर के नीलकण्ठेश्वर मन्दिर का जल व रज, चित्रकूट की पयस्विनी नदी व हनुमानधारा का जल, भगवान कामतानाथ जी की रज लाकर बांदा कार्यालय में एकत्र किया और इसके बाद परिषद के प्रमुख पदाधिकारियों द्वारा कानपुर कार्यालय ले जाया गया। वहां सभी जिलों का एकत्रित जल व रज श्रीधाम अयोध्या भेजा जाएगा।

विश्व हिन्दू परिषद के जिलाध्यक्ष चन्द्रमोहन बेदी ने बताया कि राममन्दिर निर्माण के लिए बांदा से जल व रज ले जाने पर लोगों में हर्ष व्याप्त है।

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इस मौके पर विश्व हिन्दू परिषद के हर्षवर्धन गुप्ता, विवेक सिंह कछवाह, चन्द्रप्रकाश, अनिल बजरंग, देवराज राजपूत, महेन्द्र चैहान, विश्राम कुमार धुरिया, सुरेन्द्र भटनागर आदि दर्जनों पदाधिकारी शामिल रहे।

गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि पर 05 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन मंदिर निर्माण कार्य का शुभारम्भ करेंगे। 

विश्व के आदितीर्थो में सुमार तपोभूमि चित्रकूट का धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक दृष्टिकोण से विशेष महत्व है। भगवान श्रीराम ने 14 वर्ष के वनवास काल का सर्वाधिक साढ़े 11 वर्ष इसी पावन भूमि में व्यतीत किया था। इसी वजह से करोड़ों श्रद्धालुओं के हृदय में जन्मभूमि अयोध्या की भांति तपोभूमि चित्रकूट के प्रति गहरी आस्था है।
 
वनवास काल के दौरान प्रभु श्रीराम ने चित्रकूट गिरि को कामदगिरि मनोकामनाओं के पूरक सिद्ध होने का वरदान दिया था। तभी से प्रतिमाह अमावस्या पर देश भर से लाखों की संख्या में श्रद्धालु चित्रकूट पहुंचकर माता सती अनुसुईया के तपोबल से निकली जीवनदायनी मां मंदाकिनी में आस्था की डुबकी लगाने के बाद मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए कामदगिरि पर्वत की पंचकोसीय परिक्रमा लगाते रहे हैं। इधर कोराना लॉकडाउन की वजह से धर्म नगरी के मंदिरों के कपाट बंद होने के कारण श्रद्धालुओं का आवागमन बंद है। 
 
 05 अगस्त को जन्मभूमि अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिलान्यास किये जाने की खबर से धर्म नगरी चित्रकूट में खुशी की लहर है। भगवान श्रीराम के चित्रकूट से रहे लगाव को दृष्टिगत रखते हुए धर्म नगरी के संतों,जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों ने मंदिर निर्माण के लिए मंदाकिनी का जल एवं कामदगिरि पर्वत की रज अयोध्या भेजने का निर्णय लिया है।
 
गुरूवार को मंदाकिनी सेवा ट्रस्ट द्वारा रामघाट में आयोजित कार्यक्रम में एकत्रित कामदगिरि प्रमुख द्वार के महंत मदनगोपाल दास,दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन, भरत मंदिर के महंत दिव्यजीवन दास, रामायणी कुटी के महंत रामहृदय दास,श्रीतुलसी पीठ के युवराज आचार्य रामचंद्र दास, बाल्मीकि आश्रम लालापुर के महंत भरतदास महाराज, महंत रामजनम दास महाराज, यूपी सरकार के राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, बांदा-चित्रकूट सांसद आर के सिंह पटेल,भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रप्रकाश खरे, पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा,चेयरमैन नरेंद्र गुप्ता, जगदीश गौतम, शक्ति प्रताप सिंह आदि, श्रीमंदाकिनी सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष अश्वनी अवस्थी आदि द्वारा विधिवत पूजन के बाद मंदकिनी,पायश्वनी,राघव प्रयाग का जल एवं कामदगिरि पर्वत व बाल्मीकि आश्रम की रज कलश में भरा गया। 
 
इसके बाद प्रभु श्रीराम का जय घोष करते हुए संतों की टोली पवित्र जल व रज लेकर भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या के लिए रवाना हुई।   
लोकनिर्माण राज्यमंत्री चंद्रिका उपाध्याय एवं बांदा-चित्रकूट सांसद आर के सिंह पटेल ने कहा कि 500 वर्ष की लड़ाई के बाद राम मंदिर निर्माण की शुभ घड़ी आई है। भगवान श्री राम की जन्म स्थली अयोध्या पर भव्य मंदिर निर्माण से करोडों हिन्दुओं का सपना साकार होगा। राम मंदिर निर्माण के लिए हजारों लोगों ने संघर्ष किया। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई और अब करोड़ों राम भक्तों का सपना साकार होने जा रहा है। 
 
दीन दयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि भगवान श्रीराम विश्व के करोड़ो हिन्दुओं के आराध्य हैं। लम्बे संघर्षो के बाद जन्मभूमि अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण होने जा रहा है। भगवान श्रीराम से ही भारतवर्ष की विश्व में पहचान है। उन्होंने पूरा देश मंदिर निर्माण में अपना सहयोग कर रहा है। इसी क्रम में भगवान श्रीराम की तपोस्थली रही चित्रकूट की नदियों का जल और पर्वतों की पावन रज मंदिर निर्माण में प्रयुक्त करने के लिए अयोध्या भेजी जा रही है।