देशव्यापी NRP दिवस पर बांदा में नवजात पुनर्जीवन प्रशिक्षण, 53 स्वास्थ्यकर्मी हुए प्रशिक्षित
नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम इंडिया द्वारा 10 मई को पूरे देश में एनआरपी...
नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में आयोजित हुआ निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम
बांदा। नवजात शिशुओं की मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से नेशनल नियोनेटोलॉजी फोरम इंडिया द्वारा 10 मई को पूरे देश में एनआरपी (Neonatal Resuscitation Program) दिवस मनाया गया। इस अवसर पर देशभर में बड़े स्तर पर कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। यह अभियान नवजात शिशुओं को जन्म के समय समय पर एवं प्रभावी पुनर्जीवन सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
कार्यक्रम का नेतृत्व NNF इंडिया के अध्यक्ष डॉ. लल्लन कुमार भारती के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जन्म के समय सांस न ले पाने वाले नवजात शिशुओं को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा तत्काल सहायता मिल सके, जिससे रोकी जा सकने वाली मौतों को कम किया जा सके।
भारत में नवजात मृत्यु दर अब भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के बाद के शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में शिशुओं को सांस दिलाने की वैज्ञानिक और सरल तकनीकों का प्रशिक्षण स्वास्थ्यकर्मियों के लिए बेहद आवश्यक है।
इसी क्रम में रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में भी एनआरपी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की कोर्स समन्वयक डॉ. अनीता अग्रहारी रहीं। प्रशिक्षण में कुल 53 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें सरकारी एवं निजी क्षेत्र के स्वास्थ्यकर्मी, एसएनसीयू चिकित्सक और स्टाफ नर्स शामिल रहे।
यह प्रशिक्षण पूर्णतः निःशुल्क आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को नवजात पुनर्जीवन, श्वास सहायता तकनीक और आपातकालीन देखभाल से संबंधित व्यावहारिक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के समापन पर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर विभिन्न राजकीय चिकित्सालयों के चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी भी उपस्थित रहे।
NNF इंडिया के अनुसार, देशभर में कुल 998 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 20 हजार स्वास्थ्यकर्मियों ने भाग लिया। यह राष्ट्रव्यापी पहल एक ही दिन में सबसे अधिक नवजात पुनर्जीवन प्रशिक्षण आयोजित करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
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