विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम का हुआ आयोजन
जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कुशल मार्गदर्शन में राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इला...
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बालश्रम एवं लैंगिक समानता के विषय पर दी जानकारी
चित्रकूट। जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कुशल मार्गदर्शन में राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इला चौधरी द्वारा बालश्रम एवं लैंगिक समानता के विषय पर विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चित्रकूट इला चौधरी द्वारा बताया गया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने, बाल मजदूरी व बाल विवाह रोकने, और लैंगिक भेदभाव के दुष्चक्र को तोड़कर उन्हें लैंगिक समानता के प्रति सजग करना है। बच्चों को यह भी बताया गया कि यदि वे किसी प्रकार के शोषण का सामना करते हैं तो वे निःसंकोच इसकी शिकायत कर सकते हैं। बच्चों को हेल्पलाइन नंबरों एवं संबंधित संस्थाओं की जानकारी भी दी गई, ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे तत्काल सहायता प्राप्त कर सकें।
प्रधान मजिस्ट्रेट किशोर न्याय बोर्ड अंशुमान यादव द्वारा बालश्रम अधिनियम 2016 पर भी जानकारी देते हुये बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में काम पर रखना पूरी तरह प्रतिबन्धित है एवं किशोरों को खतरनाक व्यवसायों जैसे खदानों, ज्वलनशील पदार्थों या कारखानो में काम पर रखना कानूनन अपराध है। उन्होंने बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने हेतु प्रेरित किया गया।
सहायक लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल योगेन्द्र सिंह द्वारा राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) में आवासित किशोर अपचारियों को बालश्रम एवं लैंगिक समानता के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुये बताया गया कि बाल अपचारियों को विधिक प्रावधानों के साथ-साथ अधिनियम का उलंघन करने पर सजा के प्रावधानों तथा भारतीय संविधान में वर्णित मूल अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी तथा लैंगिक असमानता को दूर करने के लिये बच्चों को जागरूक रहने के लिये प्रेरित किया गया।
सहायक लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल स्वाती तिवारी द्वारा राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर) में आवासित किशोर अपचारियों को बताया गया कि बाल श्रम एक ऐसा अपराध है, जिसमें बच्चों को बहुत कम उम्र में काम करने के लिये मजबूर किया जाता है। बाल श्रम अधिनियम 2016 के अनुसार 15 वर्ष के कम उम्र के बच्चों से काम कराना कानूनी अपराध है। इसका मुख्य कारण गरीबी, अशिक्षा जैसी समस्यायें हैं। अगर माता-पिता शिक्षित होगें या फिर उन्हे पैसों की जरूरत नहीं होगी तो अपने बच्चों को इन सब कुरीतियों में नहीं लगायेगें। उनके अशिक्षित होने के कारण वह यह नहीं समझ पाते कि सरकार द्वारा शिक्षा का अधिकार जिसमें 6 से 14 वर्ष के बालकों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने का नियम है उससे वह अवगत नहीं हैं। प्रेरणा दायक पंक्तियों से उनमें हौसलाअफ्जई की जो हैं ‘ ख्वाहिसे तो बहुत थी हमारी भी बस्ता उठाकर स्कूल जाने की, मगर मजबूरी ने हमें मजदूर बना दिया‘।
इस अवसर पर संस्था प्रभारी बीर सिंह, परामर्शदाता दीपक शर्मा, रवि कुमार एवं अंगद बाबू पैरालीगल वालेण्टियर व राजकीय सम्प्रेक्षण गृह के कर्मचारी व बाल अपचारीगण मौजूद रहे।
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