बदलेगी बांदा की सूरत : यूपी-एमपी बॉर्डर पर ₹1.88 करोड़ की लागत से बनेगा भव्य प्रवेश द्वार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘गुड गवर्नेंस’ और सीमावर्ती क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास की नीति अब जनपद बांदा में धरातल पर उतरती दिखाई दे रही है...

Apr 30, 2026 - 18:04
Apr 30, 2026 - 18:09
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बदलेगी बांदा की सूरत : यूपी-एमपी बॉर्डर पर ₹1.88 करोड़ की लागत से बनेगा भव्य प्रवेश द्वार
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  • योगी सरकार का मास्टरप्लान : दुरेडी-इटवा-लोहरा मार्ग पर विकास को लगेंगे पंख, कनेक्टिविटी होगी और भी मजबूत
  • सीमावर्ती क्षेत्रों का कायाकल्प: जनवरी 2027 तक पूरा होगा प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य
  • गुड गवर्नेंस का असर: उपेक्षित सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे में सुधार की बड़ी कवायद

बांदा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘गुड गवर्नेंस’ और सीमावर्ती क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास की नीति अब जनपद बांदा में धरातल पर उतरती दिखाई दे रही है। बांदा जिले को मध्य प्रदेश से जोड़ने वाली सीमा पर अब उत्तर प्रदेश की भव्यता और विकास की झलक दिखेगी। शासन ने दुरेडी-इटवा-लोहरा व परमपुरवा मार्ग पर एक भव्य प्रवेश द्वार के निर्माण की स्वीकृति दे दी है, जिससे न केवल जिले की कनेक्टिविटी सुदृढ़ होगी, बल्कि सीमावर्ती इलाकों की पूरी तस्वीर बदल जाएगी।

₹1.88 करोड़ की लागत से निखरेगी सीमा

क्षेत्रीय विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए योगी सरकार ने 1 करोड़ 88 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। इस प्रवेश द्वार के माध्यम से बांदा जनपद की सीमा में प्रवेश करने वाले आगंतुकों का स्वागत शाही अंदाज में किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस निर्माण से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

जनवरी 2027 तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य

परियोजना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने का रोडमैप तैयार किया है। इसके लिए 13 जनवरी 2027 तक की समय सीमा (डेडलाइन) निर्धारित की गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कार्य की गुणवत्ता और समय सीमा से कोई समझौता न किया जाए।

विकास की नई इबारत

वर्षों से उपेक्षित रहे इन सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए यह परियोजना एक बड़ी सौगात मानी जा रही है। बेहतर कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुशासन का ही परिणाम है कि अब दूर-दराज के इलाकों में भी आधुनिक ढांचे का निर्माण हो रहा है। इस भव्य प्रवेश द्वार के बनने से बांदा के विकास को सचमुच नए पंख लगने वाले हैं।

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