बांदा : 10 साल पुराने गैंगस्टर मामले में अदालत का फैसला, तीन को सजा
जनपद बांदा की एक विशेष अदालत ने संगठित गिरोह बनाकर क्षेत्र में दहशत फैलाने और अपराध करने वाले तीन अभियुक्तों को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी करार...
- 2014 में शहर कोतवाली में दर्ज हुआ था गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा
- विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) ने सुनाया फैसला, 6-6 हजार का जुर्माना भी लगाया
बांदा। जनपद बांदा की एक विशेष अदालत ने संगठित गिरोह बनाकर क्षेत्र में दहशत फैलाने और अपराध करने वाले तीन अभियुक्तों को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी करार दिया है। न्यायालय ने तीनों दोषियों को 3-3 वर्ष के कठोर कारावास और 6-6 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह मामला कोतवाली नगर में साल 2014 में दर्ज किया गया था।
आर्थिक लाभ के लिए करते थे अपराध
विशेष लोक अभियोजक (गैंगस्टर एक्ट) सौरभ सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि तत्कालीन वादी विवेकानंद तिवारी द्वारा वर्ष 2014 में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा (मु.अ.सं. 475/2014) दर्ज कराया गया था। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) की धारा 2/3 के तहत अभियुक्त राहुल (पुत्र भृगुनाथ प्रसाद सोनी), धर्मपाल सिंह (पुत्र रामचरण उर्फ रामभरोसे) और अश्वनी सोनी (पुत्र जगरूप सोनी) के विरुद्ध की गई थी। अभियोजन के अनुसार, इन अभियुक्तों का एक संगठित गिरोह था जो आर्थिक और भौतिक लाभ के लिए आदतन अपराध करता था।
गवाही देने से कतराते थे लोग
इन शातिर अपराधियों के खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। क्षेत्र में इनका इतना आतंक था कि आम जनता दहशत के कारण इनके विरुद्ध न तो शिकायत करती थी और न ही गवाही देने की हिम्मत जुटा पाती थी। पुलिस ने इनके आपराधिक इतिहास के आधार पर गैंग चार्ट तैयार किया और सक्षम प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की। मामले की विवेचना उप निरीक्षक शिवमिलन और संतराम द्वारा की गई तथा साक्ष्य संकलन कर आरोप पत्र न्यायालय में भेजा गया।
प्रभावी पैरवी से अंजाम तक पहुंचा मामला
न्यायालय में 17 अगस्त 2015 को अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप तय किए गए थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 6 गवाह पेश किए। अभियोजन विभाग से समन्वय स्थापित कर पैरोकार अभिलाष यादव, कोर्ट मोहर्रिर रघुनाथ और अमित ने प्रभावी पैरवी की और समयबद्ध रूप से साक्ष्य प्रस्तुत किए।
जुर्माना न देने पर बढ़ेगी सजा
उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को सही पाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट), बांदा श्रीपाल सिंह की अदालत ने तीनों अभियुक्तों (राहुल, धर्मपाल सिंह और अश्वनी सोनी) को दोषी करार दिया। अदालत ने अपने निर्णय में तीनों को 3-3 वर्ष के कठोर कारावास और 6-6 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है। अर्थदंड (जुर्माना) अदा न करने की स्थिति में प्रत्येक दोषी को दो-दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
