बाँदा : गैंगस्टर एक्ट में दोषी करार, शातिर वाहन चोर को 8 वर्ष की कठोर कारावास की सजा

जनपद बांदा में गैंगस्टर एक्ट के एक महत्वपूर्ण मामले में न्यायालय ने शातिर अपराधी को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है...

Jun 9, 2026 - 18:06
Jun 9, 2026 - 18:14
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बाँदा : गैंगस्टर एक्ट में दोषी करार, शातिर वाहन चोर को 8 वर्ष की कठोर कारावास की सजा
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चोरी की मोटरसाइकिलों के फर्जी कागजात बनाकर बेचने वाले गिरोह के सक्रिय सदस्य को न्यायालय ने सुनाया फैसला

बांदा। जनपद बांदा में गैंगस्टर एक्ट के एक महत्वपूर्ण मामले में न्यायालय ने शातिर अपराधी को दोषी ठहराते हुए कठोर सजा सुनाई है। विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने बताया कि थाना कोतवाली नगर में पंजीकृत गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में न्यायालय ने अभियुक्त रियाजुद्दीन पुत्र रमजान, निवासी मौदहा, जनपद हमीरपुर को दोषी पाते हुए 8 वर्ष के कठोर कारावास एवं 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।

उन्होंने बताया कि तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कोतवाली नगर द्वारा 29 जनवरी 2010 को दर्ज कराए गए मामले में अभियुक्त एक संगठित अपराधी गिरोह का सक्रिय सदस्य पाया गया था। इस गिरोह के विरुद्ध थाना कोतवाली नगर में गैंगस्टर एक्ट की धारा 3(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट श्री पाल सिंह की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए 8 वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में अभियुक्त को 7 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

चोरी की बाइक बेचने का संगठित गिरोह

अभियोजन के अनुसार गिरोह का सरगना अफरोज मिर्जा है, जबकि रियाजुद्दीन इसका सक्रिय सदस्य था। गिरोह के सदस्य चोरी की मोटरसाइकिलें चुराकर उनके फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे और बाद में उन्हें बेचकर अवैध आर्थिक लाभ अर्जित करते थे। इसके अलावा गिरोह के सदस्य अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी संलिप्त रहे हैं।

विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह ने बताया कि गिरोह के आतंक और दबंगई के कारण क्षेत्र में भय का माहौल बना रहता था, जिससे लोग इनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने या गवाही देने का साहस नहीं कर पाते थे। गिरोह के विरुद्ध तैयार गैंग चार्ट को जिलाधिकारी बांदा से अनुमोदित कराए जाने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया था।

प्रभावी पैरवी से मिली सफलता

मामले की विवेचना निरीक्षक राजेंद्र बहादुर सिंह द्वारा की गई थी। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह, पैरोकार सुजीत कुमार तथा कोर्ट मोहर्रिर राकेश सिंह तोमर ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए। इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।

अभियोजन विभाग ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्यों के विरुद्ध भी विभिन्न गंभीर धाराओं में न्यायालय में मुकदमे विचाराधीन हैं।

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