105 घंटे बाद बोरवेल में फंसा राहुल, मौत को परास्त कर योद्धा बनकर बाहर निकला

छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में बोरवेल में फंसा राहुल साहू आखिरकार 105 घंटे बाद बोरवेल से बाहर आ गया है..

Jun 15, 2022 - 03:40
Jun 15, 2022 - 03:50
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105 घंटे बाद बोरवेल में फंसा राहुल, मौत को परास्त कर योद्धा बनकर बाहर निकला

छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में बोरवेल में फंसा राहुल साहू आखिरकार 105 घंटे बाद बोरवेल से बाहर आ गया है। जैसे ही रेस्क्यू टीम उस तक पहुंची, तब बाहर में भारतीय सेना और एनडीआरएफ जिंदाबाद के नारे लगे। राहुल ने बाहर आते ही चारों ओर देखता रहा। राहुल को तत्काल सेना के जवानों ने घेरकर एंबुलेंस तक पहुंचाया और उसे बिलासपुर अपोलो हॉस्पिटल के लिए रवाना किया।

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एंबुलेंस में पहले ही मेडिकल टीम तैनात थी, जो जरूरी चिकित्सा देते हुए हॉस्पिटल तक पहुंची। सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर राहुल के बाहर आने की जानकारी दी और उसके स्वास्थ्य के लिए कामना की। सीएम ने रेस्क्यू टीम को बधाई दी है। राहुल को देखने के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग जुटे थे। राहुल की पहली झलक मिलने के बाद इनकी संख्या बढ़ गई। इसे देखते हुए प्रशासन को यह अनाउंसमेंट करना पड़ा कि लोग गड्‌ढे से दूर रहें, जिससे गिरने का खतरा न रहे। 


 
 जांजगीर जिले के मालखरौदा ब्लॉक के पिहरिद गांव में 10 साल का राहुल साहू शुक्रवार को करीब चार बजे अपने ही घर के पीछे की बाड़ी में गिरा था। यह सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम और अधिकारी पहुंचे। मामले की गंभीरता को समझते हुए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवान भी रेस्क्यू करने के लिए पहुंचे। बेहद गंभीर परिस्थिति में राहुल को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन शुरू किया गया।

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राहुल के दिव्यांग होने के कारण कई तरह की चुनौतियां सामने आईं। वह बोल और सुन नहीं सकता। मानसिक स्थिति भी कमजोर है, इसलिए उसे बाल्टी की मदद से बाहर निकालने की कोशिश सफल नहीं हो पाई। शुक्रवार शाम से मंगलवार देर रात तक कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला, एसपी विजय अग्रवाल, एसडीआरएफ के डायरेक्टर मयंक श्रीवास्तव, एनडीआरएफ के जवान, पुलिस, प्रशासन और हेल्थ की टीम डटी रही।  

 जांजगीर जिले के मालखरौदा ब्लॉक के पिहरिद गांव में 10 साल का राहुल साहू शुक्रवार को जब मंगलवार की देर रात बाहर निकाला गया। तो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लिखा माना कि चुनौती बड़ी थी, हमारी टीम भी कहाँ शांत खड़ी थी, रास्ते अगर चट्टानी थे तो इरादे हमारे फौलादी थे।

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