प्राधिकरण सचिव ने जिला कारागार का निरीक्षण कर देखी व्यवस्थाएं

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष जनपदद न्यायाधीश के मार्गदर्शन में बुधवार को जिला कारागार का जिला विधिक सेवा प्राधिकरण...

Jun 4, 2026 - 12:35
Jun 4, 2026 - 12:35
 0  4
प्राधिकरण सचिव ने जिला कारागार का निरीक्षण कर देखी व्यवस्थाएं

चित्रकूट। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष जनपदद न्यायाधीश के मार्गदर्शन में बुधवार को जिला कारागार का जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव इला चौधरी ने औचक निरीक्षण एवं विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया।

निरीक्षण के दौरान जिला कारागार में संचालित लीगल एड क्लीनिक  एवं हेल्प डेस्क का निरीक्षण किया गया। लीगल एड क्लीनिक में अनुरक्षित समस्त पंजिकाओं को देखा गया। समस्त पंजिकाओं की प्रवृष्टियां नियमानुसार अंकित पायी गयी। लीगल एड क्लीनिक में नियुक्त पैरालीगल वालेण्टियर्स को निर्देशित किया गया कि यदि कोई बन्दी अपने मुकदमें की पैरवी के लिए व्यक्तिगत अधिवक्ता करने में अक्षम है तो नियमानुसार पत्राचार करते हुये अधीक्षक जिला कारागार चित्रकूट के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से बन्दी के मुकदमें की पैरवी के लिए अधिवक्ता प्राप्त करा सकते हैं। बच्चा बैरक में एक बन्दी 18 वर्ष से कम उम्र का पाया गया। जिसको बताया गया कि लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से उम्र के सम्बन्ध में प्रार्थना पत्र सम्बन्धित न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें। जिससे वह भारतीय कानून के तहत उसे विशेष संरक्षण और लाभ प्राप्त कर सकता है।

बैरक संख्या 10, 21, 22, बच्चा बैरक एवं महिला बैरक के बन्दियों को जेल सभागार में एकत्रित कर प्री-लिटिगेशन की जानकारी देते हुए सचिव ने बताया कि किसी विवाद या शिकायत को लेकर औपचारिक रूप से अदालत जाने या मुकदमा दायर करने से पहले किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बातचीत, मध्यस्थता या कानूनी नोटिस के माध्यम से मामलों को जल्दी, सस्ता और शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना है। प्री-लिटिगेशन के अन्तर्गत विवादों को न्यायालय के बाहर सुलझाने के लिये विवादित पक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण  या संबंधित प्राधिकरण के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करता है। दूसरे पक्ष को नोटिस भेजकर सुनवाई के लिए बुलाया जाता है। मध्यस्थ या सुलहकर्ता दोनों पक्षों को समझाकर समाधान का प्रयास करता है, दि दोनों पक्ष सहमत हो जाते हैं तो समझौता पत्र तैयार किया जाता है एवं यदि दोनो पक्षों के मध्य समझौता नहीं हो पाता तो पक्षकार न्यायालय में मुकदमा दायर करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। शिवशंकर उपाध्याय डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल ने बताया कि न्यायालय में मुकदमा दायर करने के पहले विवाद के समाधान के लिए जो प्रक्रिया अपनाई जाती है उसे प्री-लिटिगेशन कहा जाता है। कुलदीप सिंह सहायक लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल ने बताया कि यह आधुनिक न्याय व्यवस्था का प्रभावी और आवश्यक अंग है। यह विवादों के समाधान का सरल, त्वरित, किफायती एवं सौहार्दपूर्ण माध्यम प्रदान करता है। इस अवसर पर जेल अधीक्षक कुश कुमार सिंह, गया प्रसाद चीफ लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल, सुनील कुमार वर्मा जेलर, कौशलेन्द्र मिश्रा डिप्टी जेलर, बृजकिशोरी डिप्टी जेलर आदि मौजूद रहे।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0