बांदा में जलभराव वाले 57 गांवों में स्वास्थ्य विभाग की निरोधात्मक कार्रवाई
जनपद में लगातार बारिश के चलते कई गांवों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संक्रामक बीमारियों की रोकथाम, बचाव एवं उपचार...
संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए दवा का छिड़काव, 16,871 क्लोरीन गोलियां और 5,828 ओआरएस पैकेट बांटे
बांदा। जनपद में लगातार बारिश के चलते कई गांवों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने संक्रामक बीमारियों की रोकथाम, बचाव एवं उपचार के लिए निरोधात्मक कार्रवाई तेज कर दी है। जल प्लावित ग्रामों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा दवाओं का छिड़काव करने के साथ ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी दी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनपद के जसपुरा ब्लॉक के 11, बड़ोखर के 7, नरैनी के 7, बबेरू के 9, तिंदवारी के 8, कमासिन के 5, बिसंडा के 3 और महुआ के 7 गांवों में अत्यधिक जलभराव की स्थिति सामने आई है। इन गांवों में विभागीय टीमों द्वारा संक्रामक रोगों से बचाव के लिए लार्वा निरोधक दवा और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है।
जलभराव प्रभावित गांवों में ग्रामीणों को 5,828 पैकेट ओआरएस वितरित किए गए हैं। वहीं, पानी को पीने योग्य बनाने के लिए 16,871 क्लोरीन की गोलियां भी वितरित की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग की ब्लॉक स्तरीय टीमें गांवों में लगातार निगरानी कर रही हैं।
अधिकारियों के मुताबिक जलभराव वाले क्षेत्रों में बुखार से पीड़ित मरीज मिलने पर उनकी मलेरिया की जांच कराई जा रही है, ताकि समय रहते बीमारी की पहचान कर उपचार शुरू किया जा सके। ग्रामीणों को साफ पानी पीने, आसपास स्वच्छता बनाए रखने और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
वहीं, जल प्लावित गांवों में मरीजों के उपचार के लिए सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक तैयारियां की गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्पतालों में आवश्यक बेड, सामान्य एवं आकस्मिक उपचार की व्यवस्था तथा जीवनरक्षक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।
विभाग के पास एसवी 1108, 6,000 पैकेट ब्लीचिंग पाउडर (25 किग्रा प्रति पैकेट), 2.50 लाख क्लोरीन की गोलियां और 4,12,055 पैकेट ओआरएस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध बताया गया है। विभाग का कहना है कि जलभराव वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि बारिश के बाद संक्रामक बीमारियों के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
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