प्रेस क्लब अध्यक्ष के घर दूसरी बार धमकाने गए ब्लैकमेलर अरविंद सिंह गौतम की रात हवालात में गुजरी और दूसरा मुकदमा दर्ज
पत्रकारिता को कलंकित करने वाले ब्लैकमेलर्स में अरविंद सिंह गौतम के साथ-साथ बांदा जनपद में 3-4 ब्लैकमेलर्स और भी हैं, जो समय-समय पर अपना और अपने परिवार का पेट पालने के नाम पर जनपद के प्रतिष्ठित लोगों को ब्लैकमेल करके दो जून की रोटी का जुगाड़ करते हैं। जरूरत है ऐसे लोगों पर भी अंकुश लगाने की, क्योंकि समाजसेवा के प्रतिरूप पत्रकारिता को लगातार कलंकित करते हुए इन लोगों ने हद पार कर दी है।

बांदा
शहर कोतवाली अंतर्गत आवास विकास में रहने वाला अरविंद सिंह गौतम ने बीती रात तकरीबन साढ़े आठ बजे इसी मोहल्ले में रहने वाले अधिवक्ता और बांदा प्रेस क्लब के अध्यक्ष दिनेश निगम दद्दा के घर पर जाकर उन्हें गाली-गलौज करते हुए जान से मारने का प्रयास किया। जिस पर दिनेश निगम द्वारा पुलिस को सूचना दी गई। त्वरित कार्यवाही करते हुए सिविल लाइन चौकी इंचार्ज परवेज़ खान दल बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने भी काफी देर तक अरविंद सिंह गौतम को समझाने का प्रयास किया, पर नशे में धुत्त अरविंद सिंह गौतम पुलिस के सामने ही दिनेश निगम दद्दा और उनके साथियों को सरेआम धमकाता रहा। बाद में न मानने पर पुलिस उसे गिरफ्तार करके नगर कोतवाली ले गई। शराब के नशे में धुत्त अरविंद सिंह गौतम जिस कार को चलाकर आया था, उस कार को भी पुलिस ने जब्त करके सिविल लाइन चौकी में खड़ा कर दिया।
पीड़ित दिनेश निगम द्वारा उक्त घटनाक्रम की लिखित तहरीर देने पर बांदा पुलिस ने अरविंद सिंह गौतम के विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 323, 504 व 506 में मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने रात में ही जिला अस्पताल में अरविंद सिंह गौतम को ले जाकर उसका मेडिकल परीक्षण कराया, जिसमें उसके नशे में होने की पुष्टि भी हुई है। सुबह होने पर पुलिस ने पीड़ित दिनेश निगम का भी मेडिकल कराया है। साथ ही आरोपी अरविंद सिंह गौतम का धारा 151 के तहत चालान करके निजी मुचलके पर आज दोपहर उसे रिहा कर दिया है। इस मामले की विवेचना सिविल लाइन चौकी इंचार्ज परवेज़ खान को सौंपी गई है।
आपको बता दें कि अरविंद सिंह गौतम द्वारा गुंडागर्दी का ये कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि पहले भी वो ऐसी कई घटनाओं को अंजाम देता रहा है। बांदा प्रेस क्लब के अध्यक्ष के साथ विगत 22 दिसंबर को भी उसने हाथापाई करते हुए गाली गलौज की थी, साथ ही उनकी पत्नी व बेटियों की मोबाइल से फोटो भी खींची थी। उस पर भी पुलिस ने अरविंद सिंह गौतम के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। जिस पर विवेचना चल रही है।
इसके अलावा बांदा प्रेस क्लब के उपाध्यक्ष संजय मिश्रा को भी अपराधिक प्रवृत्ति का ये शख्स पूर्व में धमका चुका है, जिस पर संजय मिश्रा, जोकि एपीएन टीवी चैनल के जिला संवाददाता भी हैं, के द्वारा मटौंध थाने में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।
बांदा में अनुसूचित जाति की एक समाजसेविका को भी पूर्व में ये कॉलगर्ल जैसे अपशब्द लिखकर सरेआम उनकी छवि को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास कर चुका है। जिसके बाद उक्त महिला ने भी पुलिस कप्तान को प्रार्थनापत्र देकर अरविंद सिंह गौतम के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की थी। यह मामला भी विचाराधीन है। वह आदतन शहर के तमाम लोगों को पहले भी गाली-गलौज कर उनसे वसूली कर चुका है। पूर्व में कालू कुआं चौराहे के एक दवा व्यवसायी को फर्जी बिल बनाकर कई हजार की अवैध वसूली कर चुका है। तो वहीं एक और पत्रकार के भांजे को भी धमकाकर और दबाव बनाकर उससे वसूली कर चुका है।
ऐसा नहीं है कि अरविंद सिंह गौतम ने सिर्फ बाहरी लोगों के साथ गुंडागर्दी की हो, बल्कि ये अपने सगे भाई और पिता के साथ भी हाथापाई कर गाली गलौज करता रहा है। पिता के साथ मारपीट करना इसकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन गया था, अपने भाई से भी लड़ता रहता था। यहां तक कि इसने अपने पिता, भाई और भतीजे के विरूद्ध मुकद्मा भी पंजीकृत कराया था, जिसके कारण इसके पिता की मृत्यु तक हो गयी। इस प्रकार देखा जाये तो अरविंद सिंह गौतम के ऐसे बहुत से मामले हैं, जहां से यह गाली-गलौज, मारपीट, ब्लैकमेलिंग और दबाव बनाकर अवैध वसूली करता है और अब तो यह अवैध वसूली का पेशेवर भी बन गया है।
अधिवक्ता व बांदा प्रेस क्लब के अध्यक्ष दिनेश निगम दद्दा ने मांग की है कि अपने को पत्रकार बताकर पत्रकारिता को कलंकित करने वाले ऐसे पेशेवर ब्लैकमेलर और अपराधी के विरूद्ध कड़ी से कड़ी कार्यवाही होनी चाहिये। जिससे शहर वासियों को इस पेशेवर ब्लैकमेलर की गुंडई से निजात मिल सके।
पत्रकारिता को कलंकित करने वाले ब्लैकमेलर्स में अरविंद सिंह गौतम के साथ-साथ बांदा जनपद में 3-4 ब्लैकमेलर्स और भी हैं, जो समय-समय पर अपना और अपने परिवार का पेट पालने के नाम पर जनपद के प्रतिष्ठित लोगों को ब्लैकमेल करके दो जून की रोटी का जुगाड़ करते हैं। जरूरत है ऐसे लोगों पर भी अंकुश लगाने की, क्योंकि समाजसेवा के प्रतिरूप पत्रकारिता को लगातार कलंकित करते हुए इन लोगों ने हद पार कर दी है। अधिकारी भी ऐसे ब्लैकमेलर्स को लेकर असमंजस की स्थिति में रहते हैं, क्योंकि अक्सर ट्रांसफर के चलते वो ज्यादा समय एक जनपद में रुक नहीं पाते। और किसी असली पत्रकार की तुलना में ये ब्लैकमेलर्स फील्ड पर ज्यादा दिखाई देते हैं। कारण कि इन्हें खबर से मतलब नहीं होता, बल्कि ये रोज किसी न किसी मुर्गे की तलाश में रहते हैं, ताकि उसे अपने चंगुल में फंसाकर उन्हें वक्त रहते हलाल किया जा सके। लेकिन जल्द ही ऐसे ब्लैकमेलर्स का खुलासा होगा और बांदा की पत्रकारिता में पनप रही गंदगी को समाप्त कर इसे पवित्र किया जायेगा।
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