साधु-संतों ने मठ मंदिरों के अस्तित्व को लेकर भरी हुंकार

तीर्थक्षेत्र की प्राचीन धरोहर गौरिहार मंदिर की संभावित तोड़फोड़ को लेकर संत समाज ने हुंकार भरते हुए चेतावनी दी है कि यदि...

Jan 1, 2026 - 11:46
Jan 1, 2026 - 11:47
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साधु-संतों ने मठ मंदिरों के अस्तित्व को लेकर भरी हुंकार

चित्रकूट। तीर्थक्षेत्र की प्राचीन धरोहर गौरिहार मंदिर की संभावित तोड़फोड़ को लेकर संत समाज ने हुंकार भरते हुए चेतावनी दी है कि यदि पर्यटकीय विकास के नाम पर भगवान राम की तपस्थली में अब किसी भी धार्मिक सांस्कृतिक धरोहर को क्षति पहुंचाई गई तो संत समाज शासन प्रशासन के विरुद्ध तीव्र आंदोलन करेगा।

एक दिवसीय आंशिक धरना देते हुए संत समाज ने प्रशासन को आगाह किया। धरने का नेतृत्व करते हुए ब्रम्हचारी सनकादिक महराज ने कहा कि संत समाज लगातार शासन प्रशासन को लिखित रूप से कहता आ रहा है तीर्थक्षेत्र में पर्यटकीय विकास हो लेकिन प्राचीन मठ-मंदिरों को क्षति न पहुंचे। मठ-मंदिर ही प्राचीनकाल से चित्रकूटधाम की सांस्कृतिक पहचान हैं। चौड़ी सड़कों का संजाल बसाहट के बाहर किया। परिक्रमा की ओर जाने वाले मार्ग पैदल श्रद्धालुओं के लिए हैं, उस दृष्टि से ही उनका चौड़ीकरण हो, वाहनों के लिए बसाहट के चारों ओर चौड़े मार्ग सुनिश्चित किए जाएं। भरत मंदिर के महंत दिव्यजीवन दास महाराज ने कहा कि शासन प्रशासन की मंशा ठीक नहीं है। विशेष अधिनियम बनाकर तीर्थक्षेत्र के मठ मंदिरों को सरकार भ्रष्ट कर्मचारियों के हवाले करना चाहती है। यह किसी भी सूरत में होने नहीं देंगे। मठ-मंदिरों की स्थापना में संत पूर्वजों का त्याग, तप, परिश्रम और लाखों श्रद्धालुओं का सहयोग लगा है। प्राचीन समय से संत सेवा, जनसेवा केंद्र हैं। मठ-मंदिर उनकी गरिमा के साथ खिलवाड़ हुआ तो संत समाज बर्दाश्त नहीं करेगा।

अखिल भारतीय विरक्त संत मंडल के सचिव डा मदन गोपाल दास महाराज ने बताया कि शासन प्रशासन को बार-बार ज्ञापन दिया जा रहा है। विकास की रूपरेखा को लेकर संतों के साथ प्रशासनिक बैठक नहीं संभव नहीं हुई। प्रशासन का संत समाज के प्रति रवैया ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री यदि संतों की आवाज को संज्ञान में नहीं लेते तो संत समाज सड़क पर तीव्र आंदोलन को बाध्य हो जाएगा। धरने पर संत रूपनारायण दास, सच्चिदानन्द शरण, राममनोहर दास, बलराम दास, माधवदास आदि समेत लगभग आधा सैकड़ा संत मौजूद रहे।

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