निजी स्कूलों की मनमानी और भारी बस्ते के खिलाफ विधायक प्रकाश द्विवेदी ने खोला मोर्चा
बांदा सदर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक प्रकाश द्विवेदी ने प्रदेश के निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा अभिभावकों और बच्चों के किए जा रहे शोषण...
मुख्यमंत्री को पत्र लिख जताई नाराजगी; बोले- शिक्षा सेवा नहीं, व्यवसाय बन गई है
बांदा। बांदा सदर विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक प्रकाश द्विवेदी ने प्रदेश के निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा अभिभावकों और बच्चों के किए जा रहे शोषण के विरुद्ध आवाज बुलंद की है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत पत्र लिखकर निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं और इस दिशा में प्रभावी कानूनी कार्यवाही की मांग की है।
महंगी किताबें और 'कोर्स' का मायाजाल
विधायक ने पत्र में कहा कि वर्तमान में निजी स्कूल शिक्षा को सेवा के बजाय पूरी तरह व्यावसायिक बना चुके हैं। हर साल जानबूझकर पाठ्यक्रम बदल दिया जाता है ताकि अभिभावक पुरानी किताबों का उपयोग न कर सकें। इससे न केवल मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, बल्कि बड़े भाई-बहनों की पुस्तकें छोटे बच्चों के काम न आने से संसाधनों की भी भारी बर्बादी हो रही है।
भारी बस्ता: बचपन पर बोझ
बच्चों के स्वास्थ्य पर चिंता जताते हुए प्रकाश द्विवेदी ने कहा कि स्कूल बैग का बढ़ता वजन मासूमों के शारीरिक विकास में बाधक बन रहा है। निर्धारित मानकों की अनदेखी कर बच्चों को भारी वजन ढोने पर मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
"पुस्तकों के अनावश्यक परिवर्तन से हर साल लाखों टन कागज व्यर्थ हो रहा है, जो पर्यावरणीय दृष्टि से भी एक बड़ा अपराध है। अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण ही निजी स्कूलों के हौसले बुलंद हैं।"
— प्रकाश द्विवेदी, विधायक सदर (बांदा)
विधायक की मुख्यमंत्री से प्रमुख मांगें:
जनहित को सर्वोपरि रखते हुए विधायक ने मुख्यमंत्री के समक्ष सात सूत्रीय मांगें रखी हैं:
- समान पाठ्यक्रम: पूरे प्रदेश में एक समान पाठ्यक्रम लागू किया जाए।
- NCERT की अनिवार्यता: सभी निजी स्कूलों में NCERT आधारित शिक्षा अनिवार्य हो।
- मूल्य नियंत्रण: पुस्तकों की कीमतों और प्रकाशकों के कमीशन के खेल पर सख्त लगाम लगे।
- बैग नीति: स्कूल बैग के वजन संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन हो।
- जांच समिति: जिला स्तर पर विशेष समिति बने जो स्कूलों की फीस और कार्यप्रणाली की जांच करे।
- जवाबदेही: लापरवाही बरतने वाले शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
- शिकायत निवारण: अभिभावकों के लिए एक पारदर्शी और प्रभावी शिकायत पोर्टल बनाया जाए।
विधायक ने आशा व्यक्त की है कि सरकार इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए जल्द ही कठोर नीति लागू करेगी, ताकि बच्चों के भविष्य और अभिभावकों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित किया जा सके।
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