गैंगस्टर एक्ट में बड़ी सजा : संगठित अपराध के आरोपी सुनील कोरी को 2 वर्ष 4 माह कारावास
जनपद बांदा में संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) प्रदीप कुमार मिश्रा...
अपर सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत का फैसला
बांदा। जनपद बांदा में संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने थाना मटौंध में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 226/23 (धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट) में अभियुक्त सुनील कोरी पुत्र रामजीवन को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उसे 2 वर्ष 4 माह के कठोर कारावास और ₹5,000 के अर्थदंड से दंडित किया है। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य था अभियुक्त
विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह ने बताया कि सुनील कोरी एक संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य था। पुलिस द्वारा तैयार गैंग चार्ट में उसके विरुद्ध चोरी, लूट, जानलेवा हमला और अवैध हथियार रखने जैसे गंभीर अपराध दर्ज पाए गए। इन्हीं मामलों के आधार पर उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
प्रभारी निरीक्षक मटौंध श्री राम दिनेश तिवारी द्वारा 20 अक्टूबर 2023 को थाना मटौंध में गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा पंजीकृत कराया गया था।
अभियुक्त पर दर्ज प्रमुख मुकदमे
गैंग चार्ट के अनुसार अभियुक्त के खिलाफ निम्न प्रकरण दर्ज थे—
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केस क्राइम संख्या 36/2023 – धारा 379/411 भा.दं.सं., थाना मटौंध (चोरी व चोरी का माल रखने का मामला)
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केस क्राइम संख्या 80/2023 – धारा 307 भा.दं.सं. व 3/25 आर्म्स एक्ट, थाना पैलानी (जानलेवा हमला व अवैध हथियार का प्रयोग)
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केस क्राइम संख्या 115/2023 – धारा 379/411 भा.दं.सं., थाना कोतवाली नगर (चोरी का मामला)
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केस क्राइम संख्या 256/2023 – धारा 379/411 भा.दं.सं., थाना कोतवाली नगर
पुलिस के अनुसार अभियुक्त व उसके गिरोह की गतिविधियों से क्षेत्र में भय और आतंक का माहौल बना हुआ था। आमजन डर के कारण शिकायत दर्ज कराने से कतराते थे।
साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
जांच के उपरांत गैंग चार्ट तैयार कर जिलाधिकारी से अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की गई और मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। 3 फरवरी 2026 को न्यायालय द्वारा आरोप विरचित किए गए। विवेचना थाना प्रभारी कोतवाली नगर अनूप दुबे द्वारा संपन्न की गई।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह ने एफआईआर, गैंग चार्ट, गवाहों के बयान तथा अभियुक्त के आपराधिक इतिहास को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। पैरोकार संदीप कुमार एवं कोर्ट मोहर्रिर जितेंद्र कुमार द्वारा गवाहों को न्यायालय में सम्मन कर उपस्थित कराया गया।
सभी साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई।
यह फैसला जनपद में संगठित अपराध के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।
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