इस बार का बजट योगी का चुनावी पिटारा होगा

सोमवार 22 फरवरी को योगी सरकार अपने पहले शासनकाल का आखिरी बजट पेश करने जा रही है..

इस बार का बजट योगी का चुनावी पिटारा होगा

@राकेश कुमार अग्रवाल 

सोमवार 22 फरवरी को योगी सरकार अपने पहले शासनकाल का आखिरी बजट पेश करने जा रही है। जैसा कि संभावना जताई जा रही है इस बार का बजट योगी का चुनावी पिटारा होगा जिसमें युवाओं, किसानों, महिलाओं के साथ साथ छात्रों के लिए भी बहुत सारे उनके फायदे के प्रावधान किए जा सकते हैं। पूरा बजट चुनावी खुमारी से लबरेज होगा।  

दस वर्ष पहले प्रदेश का बजट 153199 करोड का था जो वित्तीय वर्ष  2021-22 में 575000 करोड पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। 18  फरवरी से बजट सत्र शुरु हो चुका है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल शोर शराबे के बीच अभिभाषण पेश कर चुकी हैं।

22 फरवरी को बजट पेश होने के बाद राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी जो 23 फरवरी को जारी रहेगी। 24 -25 फरवरी को बजट पर साधारण चर्चा होगी। 1 -3 मार्च तक बजट चर्चा 4 से लेकर 10 मार्च तक बजटीय अनुदानों की मांगों पर विचार और मतदान होगा।  

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गौरतलब है कि वर्ष 2022 यूपी का चुनावी वर्ष है। सभी पार्टियां चुनावी मोड में हैं ऐसे में भाजपा अपना चुनावी अभियान का आगाज बजट की घोषणाओं से करना चाहेगी। पार्टी का बजट  शिक्षित बेरोजगार युवाओं को नौकरी के अवसरों की बात करेगा।

साथ ही इस बात की भी संभावना भी जताई जा रही है कि संविदा पर तैनात कर्मियों को नियमित करने को लेकर भी सरकार इस बजट के माध्यम से कोई घोषणा करे क्योंकि प्रदेश में विभिन्न विभागों में संविदा पर तैनात कर्मियों की बडी संख्या है।

जो कई वर्षों से नियमित होने की आस लगाए बैठे हैं। 2020 - 21 में प्रदेश का बजट 512860.72 करोड था। जिसमें इस बार दस फीसदी की वृद्धि के कयास लगाए जा रहे हैं। जबकि कोरोना के कारण राज्य की चरमराई अर्थव्यवस्था के कारण प्रदेश की आय में 50000 करोड से अधिक की कमी का अनुमान लगाया जा रहा है।

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जिसके चलते पहले से चल रही तमाम परियोजनाओं जैसे एक्सप्रेस वे, मेट्रो रेल प्रोजेक्ट, पेंशन योजनायेंं, छात्रों की छात्रवृत्तियां व एयरपोर्टों का विकास के लिए धनावंटन करना शामिल है।

कोरोना काल में एक साल तक ठप रही स्कूल, कालेज शिक्षा के मद्देनजर ऑनलाइन शिक्षा का ढांचा सुदृढ करने के लिए कोई ठोस योजना के साथ नीति की घोषणा व धनावंटन की भी संभावना है। प्रत्येक जिले में कुछ छात्रों को लैपटाप भी वितरित किया जा सकता है।

इंटर पास करने वाले छात्र छात्राओं के लिए भी अलग से घोषणा की जा सकती है। प्रदेश स्तरीय नौकरियों के लिए आयोजित होने वाली प्रतियोगी छात्रों की तैयारी वाली स्कीम को अलग से जिले स्तर पर भी शुरु किया जा सकता है। केन्द्रीय स्तर की व बडी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी मंडल स्तर पर चलती रहेगी। नई शिक्षा नीति के आलोक में भी कुछ नीतिगत फैसलों का असर बजट में परिलक्षित हो सकता है।  

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कोविड -19 से मिले सबक के मद्देनजर स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडीकल कालेज से लेकर, पैथालाजी, वायरोलाॅजी शिक्षा को सुदृढ करने व चिकित्सा के आधारभूत ढांचा को मजबूत करने को लेकर भी बडी घोषणा की संभावना है।

प्रदेश वासियों को मुफ्त में कोरोना वैक्सीन को उपलब्ध कराए जाने का ऐलान भी किया जा सकता है। बिहार विधानसभा चुनाव में मुफ्त कोरोना वैक्सीन की घोषणा पार्टी के लिए कारगर रही थी। भाजपा मुफ्त में कोरोना वैक्सीन के बहाने वोटों की फसल काटने की उम्मीद तो पाल ही सकती है।  

अयोध्या, गोरखपुर व बनारस को भाजपा एक तरह से गोद ले चुकी है। इसलिए इन तीनों जगह के लिए विकास से जुडी तमाम योजनाओं की घोषणा के साथ लगे हाथ धनावंटन भी किया जा सकता है। महिलाओं को लुभाने के लिए भी योगी के बजट से उनके लिए कोई स्कीम आ सकती है।  

जहां तक किसानों व मजदूरों का सवाल है वोटों की एक बडी फसल सीधे इसी वर्ग से जुडी है। दिल्ली में कृषि विधेयकों को लेकर मची रार अभी थमी नहीं है ऐसे में किसानों को खुश करने के लिए कोई बडी सौगात योगी के बजट से निकल सकती है।

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इसमें ब्याजमुक्त फसली ऋण के अलावा कोल्ड स्टोरेज अवस्थापना शामिल है।  

कोरोना काल में सबसे ज्यादा कष्ट में असंगठित क्षेत्र का मजदूर रहा था। ऐसी भी संभावना जताई जा रही है कि मजदूरों के लिए बीमा योजना के साथ ही मनरेगा को भी वरीयता पर रखा जाए। नमामि गंगे की तरह गंगा मिशन के नाम पर गंगा किनारे बसे नगरों के बाद गांवों को भी इस योजना में शामिल कर कोई योजना से उन्हें भी नवाजा जा सकता है।  

केन्द्र की तर्ज पर प्रदेश में भी पहली बार पेपरलेस बजट पेश किया जाना है। इसके लिए विधायकों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है ताकि उन्हें तकनीक से लैस किया जा सके। अल्पसंख्यकों के लिए अलग से कोई घोषणा होगी इस पर संशय है लेकिन उन्हें चुनावी बजट में पूरी तरह से दरकिनार नहीं किया जाएगा।  

योगी सरकार का अंतिम बजट तय करेगा कि यह कितना चुनावी है एवं कितना प्रदेश के लिए संभावनायें जगाने वाला है। इस बजट के प्रस्तावों से ही विपक्ष अपनी चुनावी धार को पैना कर भाजपा और योगी सरकार पर हमलावर होगा। देखना यह है कि दिनोंदिन बढती पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों के बीच भाजपा अपने वोटों की फसल कैसे काट पाती है। 

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