प्रकृति से जुड़ने पर होगी जीवन की उन्नति : भागवताचार्य
मुख्यालय स्थित भैरोपागा के रायल पैलेस में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवे दिन भागवताचार्य पं विनोद शुक्ल ने भगवान श्रीकृष्ण की...
श्रीमद् भागवत कथा के छठवेे दिन रुकमिणी विवाह का कराया दर्शन
चित्रकूट। मुख्यालय स्थित भैरोपागा के रायल पैलेस में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवे दिन भागवताचार्य पं विनोद शुक्ल ने भगवान श्रीकृष्ण की आध्यात्मिक लीलाओं का रसपान श्रोताओं को कराया। उन्होंने बताया कि मानव जीवन में पंचग कार्य है। गंगा, गीता, गायत्री, गौ एवं गोविन्द का सदैव स्मरण, चिंतन एवं समादर करते रहें। जिससे मनुष्य शरीर का बोध बना रहे।
भागवत कथा व्यास ने कहा कि प्रकृति के साथ उठने बैठने, रहने से जीवन कभी अस्वस्थ्य एवं परेशान नहीं होता। वर्तमान में लोग प्रकृति को भूलते जा रहे हैं। इसलिए अनेक बीमारियों का सामना करते है। मानसिक, सामाजिक, शारीरिक उन्नति तभी होगी जतब प्रकृति का सम्मान, संरक्षण, संवर्द्धन व प्रकृति से जुड़कर रहेंगें। उन्होंने यज्ञ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ अनादि है। इसी चित्रकूट परिक्षेत्र में ब्रह्मादि देवत्व और ऋषियों ने अनेक यज्ञ किए। आज भी रामघाट में यज्ञवेदी विराजमान है। यज्ञ करने से संपूर्ण प्रकृति को विशेष ऊर्जा शक्ति प्रदान होती है। यज्ञ भारतीय संस्कृति, ज्ञान, विज्ञान, धर्म, आध्यात्म, लौकिक, भौतिक, अंतरिक्ष के नियंता, पोषक, संरक्षक माने गए हैं। वर्तमान विश्व पर्यावरण की विनाशकारी समस्या से त्रस्त है। भारतवासी अपने महानतम वैदिक ज्ञान परंपरा का अवलंबन लें। वेदो में वर्णित मंत्रो तथा यज्ञों की सुरभि द्वारा प्रकृति को शांत करें। पर्यावरण शुद्ध एवं संतुलित हो। इस दौरान रुकमणि मंगल विवाह उत्सव का विशेष दर्शन कराया। कथा यजमान पूर्व बसपा जिलाध्यक्ष रामलखन निषााद सपत्नीक आरती पूजन किया। कथा के पश्चात श्रोताओं को प्रसाद वितरित किया गया।
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