बांदा में किसानों को उद्यमी बनाने की पहल, 6 दिवसीय नवाचार प्रशिक्षण का भव्य शुभारंभ

बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्र विभाग द्वारा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (NIF-DST, भारत सरकार)...

Jul 23, 2026 - 15:13
Jul 23, 2026 - 15:16
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बांदा में किसानों को उद्यमी बनाने की पहल, 6 दिवसीय नवाचार प्रशिक्षण का भव्य शुभारंभ

एलोवेरा जेल, हर्बल उत्पाद, जूस और सॉस बनाने की तकनीकों से परिचित हुए क्षेत्र के कृषक

बांदा। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्र विभाग द्वारा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान (NIF-DST, भारत सरकार) के सौजन्य से संचालित परियोजना के तहत छह दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया। 20 से 25 जुलाई तक आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर की नवाचार प्रौद्योगिकियों के माध्यम से कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन (Value Addition), ग्रामीण आजीविका में सुधार और उद्यमिता विकास को बढ़ावा देना है, ताकि किसान व्यावहारिक कौशल सीखकर स्वयं का उद्यम स्थापित कर सकें।

प्रसंस्करण से बढ़ेगी किसानों की आय: विशेषज्ञ

उद्घाटन सत्र में कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. जी. एस. पंवार, निदेशक अनुसंधान प्रो. जगन्नाथ पाठक तथा निदेशक प्रशिक्षण एवं नियोजन प्रो. बी. पी. मिश्रा ने शिरकत की। अतिथियों ने कहा कि कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण (Processing) एवं ग्रामीण आधारित उद्यमिता ही किसानों की आय बढ़ाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने किसानों से नई तकनीकों को अपनाकर स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाने का आह्वान किया।

इस दौरान नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन के वैज्ञानिक डॉ. नवनीत ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों, एफपीओ (FPO) और एनजीओ (NGO) प्रतिनिधियों को 6 प्रमुख जमीनी नवाचार मशीनों पर व्यावहारिक प्रदर्शन और प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

6 प्रमुख नवाचार मशीनों का दिया जा रहा प्रत्यक्ष अभ्यास

प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को मुख्य रूप से 6 नवाचार प्रौद्योगिकियों का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया जा रहा है:

बहुउद्देशीय खाद्य प्रसंस्करण मशीन: इसके माध्यम से लगभग 120 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। शुरुआती सत्रों में आम व संतरे का जूस, टोमैटो केचप, सॉस, टोमैटो प्यूरी, एलोवेरा जूस व जेल, एलोवेरा साबुन, हर्बल शैम्पू, गुलाब जल, पपीते का जैम और चिली सॉस बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

  • सब्जी बीज निष्कर्षण मशीन: सब्जियों से गुणवत्तापूर्ण बीज निकालने की आधुनिक तकनीक।
  • जैविक खाद निर्माण मशीन: जैविक कचरे से त्वरित खाद तैयार करने का तरीका।
  • उन्नत दाल मिल: दालों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के लिए आधुनिक मिलिंग तकनीक।

नामचीन विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी व आर्थिक मार्गदर्शन

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ किसानों को विस्तृत तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं:

  • प्रैक्टिकल ट्रेनिंग: यमुनानगर (हरियाणा) के प्रसिद्ध खाद्य प्रसंस्करण विशेषज्ञ श्री प्रिंस कम्भोज ने मशीनों पर दो दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया।
  • खाद्य प्रद्योगिकी व फल प्रसंस्करण: डॉ. प्रतीक शुक्ला (खाद्य प्रौद्योगिकी), डॉ. प्रज्ञा ओझा और डॉ. दीक्षा पटेल (केवीके बांदा) ने फल प्रसंस्करण एवं उत्पाद निर्माण के तकनीकी सत्रों में मार्गदर्शन किया।
  • मशीन इंजीनियरिंग: डॉ. शशांक शेखर एवं डॉ. गजेंद्र सिंह (कृषि अभियांत्रिकी) ने मशीनों की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया।
  • सूक्ष्मजैविक सुरक्षा: डॉ. अमित यादव ने प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को सूक्ष्मजैविक (Microbial) एवं फंगल संक्रमण से सुरक्षित रखने के उपाय बताए।
  • विपणन व उद्यमिता: डॉ. पुनीत कुमार अग्रवाल (प्रयागराज) ने उत्पादों के आर्थिक मूल्यांकन, विपणन (Marketing) और उद्यम विकास के गुर सिखाए।

ग्रामीण स्वरोजगार में साबित होगा मील का पत्थर

इस संपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन परियोजना संचालक डॉ. पुष्पा यादव के नेतृत्व में किया जा रहा है, जिसमें डॉ. अभिषेक कालिया, डॉ. पंकज कुमार ओझा एवं डॉ. यश गौतम सह-संयोजक की भूमिका निभा रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने में मील का पत्थर साबित होगा।

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