हंस आजीविका परियोजना में दस गांव चयनित
द हंस फाउंडेशन द्वारा संचालित हंस आजीविका परियोजना के अंतर्गत विकासखंड स्तरीय हितधारकों की एक दिवसीय समन्वय कार्यशाला का आयोजन...
कार्यशाला में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के दिए गए टिप्स
चित्रकूट। द हंस फाउंडेशन द्वारा संचालित हंस आजीविका परियोजना के अंतर्गत विकासखंड स्तरीय हितधारकों की एक दिवसीय समन्वय कार्यशाला का आयोजन विकासखंड परिसर पहाड़ी में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के बेहतर अवसरों से जोड़ना, स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाना तथा ग्राम स्तर पर रोजगार एवं आय के नए स्रोत विकसित करने के संबंध में जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीडीओ संजय कुमार पांडेय एवं विशिष्ट अतिथि भूपेंद्र द्विवेदी सहायक विकास अधिकारी पंचायत रहे। अधिकारियों ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास में स्वयं सहायता समूहों और आजीविका गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं से सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। कार्यशाला में द हंस फाउंडेशन के सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर संतोष कुमार मिश्रा ने संस्था की विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हंस फाउंडेशन स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में लगातार कार्य कर रहा है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से हंस आजीविका परियोजना के तहत विकासखंड पहाड़ी की दस ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है।
चयनित ग्राम पंचायतों में चौरा, देवल, कुचारम, बकटा बुजुर्ग, नांदी, तौरा, इटौरा, बाबूपुर, छछेरिहा बुजुर्ग तथा बुढ़ा सेमरवारा शामिल हैं। जहां स्वयं सहायता समूहों को मजबूत कर महिलाओं की आय बढ़ाने, स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा उन्हें समृद्धि की ओर अग्रसर करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ श्रीकांत ने ग्रामीण महिलाओं और समूह की सदस्यों को पशुपालन व जैविक खेती के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंचुआ खाद वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग अत्यंत लाभकारी है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि समूहों को बकरी पालन और केंचुआ पालन जैसी आजीविका गतिविधियों के लिए अनुदान एवं तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसके अलावा आशाराम ब्लॉक समन्वयक, निलेश्वरी फील्ड कोऑर्डिनेटर तथा सरोज कुमार विषय विशेषज्ञ ने परियोजना के विभिन्न पहलुओं, समूह गठन, आजीविका संवर्धन, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं के समन्वय के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में चयनित 10 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान, स्वयं सहायता समूहों की बड़ी संख्या में महिला सदस्य एवं ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने परियोजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की तथा विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर भी प्राप्त किए।
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