पद्मश्री डॉ बी के जैन ने सबको कहा अलविदा, लोगों के जीवन में रोशनी देने वाला दीपक बुझा
उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं और शुभचिंतकों का तांता लगा हुआ है। रविवार सुबह 10 बजे नेत्र चिकित्सालय परिसर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा...
कल चिकित्सालय परिसर में होगा उनका अंतिम संस्कार, समूचे विंध्य सहित देश के लिए बड़ी क्षति
एक युग पुरुष एक युग और सेवा समर्पण का अंत
चित्रकूट। समूचे विंध्य क्षेत्र सहित देश के लिए अपूरणीय क्षति के रूप में पद्मश्री डॉ. बुधेन कुमार जैन (बी.के. जैन) ने शुक्रवार, 27 फरवरी 2026 को सायं लगभग 4 बजे चित्रकूट की पावन धरती पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से सेवा, समर्पण और मानवता का एक युग समाप्त हो गया।
परम पूज्य संत रणछोड़ दास जी द्वारा स्थापित श्री सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं विश्वविख्यात श्री सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक डॉ. जैन लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनका उपचार मुंबई के सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में चल रहा था।
उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए श्रद्धालुओं और शुभचिंतकों का तांता लगा हुआ है। रविवार सुबह 10 बजे नेत्र चिकित्सालय परिसर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
17 लाख से अधिक लोगों को लौटाई रोशनी
1948 में जन्मे डॉ. जैन वर्ष 1974 से श्री सदगुरु नेत्र चिकित्सालय से जुड़े और लगभग 52 वर्षों तक गरीब एवं जरूरतमंदों की आंखों की रोशनी लौटाने का कार्य किया। अनुमानतः 17 लाख से अधिक मरीजों को उन्होंने दृष्टि प्रदान की।
उनकी प्रारंभिक शिक्षा शासकीय विद्यालय व्यंकट क्रमांक सतना में हुई। 1968 से 1973 तक उन्होंने एस एस मेडिकल कॉलेज रीवा से चिकित्सा शिक्षा प्राप्त की तथा 1977-79 में मुंबई से पीजी की उपाधि हासिल की। वे वर्तमान में एम्स रायपुर के अध्यक्ष पद पर भी आसीन थे।
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान
नेत्र चिकित्सा एवं अंधत्व निवारण के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री सहित अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2023 में इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थाल्मोलॉजी ने उन्हें “भारतीय नेत्र चिकित्सा के जीवित किंवदंती” के रूप में मान्यता दी।
मई 2025 में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया, वहीं जून 2025 में दिल्ली में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया द्वारा ‘हिपोक्रेट्स लेगेसी अवार्ड’ से नवाजा गया।
सेवा का विस्तृत परिवार
डॉ. जैन की धर्मपत्नी ऊषा जैन मानव सेवा, गौ सेवा और महिला सशक्तिकरण के कार्यों में सक्रिय हैं। उनके दो पुत्र—जिनेश जैन एवं डॉ. इलेश जैन—हैं। डॉ. इलेश जैन वर्तमान में श्री सदगुरु नेत्र चिकित्सालय, जानकीकुंड के सीईओ एवं ट्रस्टी हैं। उनके परिवार में दो बहुएं और चार पौत्र-पौत्री हैं।
डॉ. बी.के. जैन के निधन से न केवल चित्रकूट बल्कि पूरे देश ने एक ऐसे युगपुरुष को खो दिया, जिन्होंने अपने जीवन को मानव सेवा और नेत्र चिकित्सा के लिए समर्पित कर दिया। सच ही कहा जा रहा है—दूसरों के जीवन में रोशनी देने वाला दीपक आज स्वयं बुझ गया।
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