श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धा-भक्ति के साथ समापन, गोवर्धन लीला का हुआ भावपूर्ण वर्णन
रामलीला मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन श्रद्धा और भक्ति के माहौल में हुआ...
रामलीला मैदान में सात दिवसीय कथा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, समापन पर हुआ भंडारा
बांदा। रामलीला मैदान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन श्रद्धा और भक्ति के माहौल में हुआ। कथा के अंतिम दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक रही। कार्यक्रम की शुरुआत आरती के साथ हुई, जिसके बाद कथा वाचक श्रद्धेय श्री राम हृदय दास जी जिज्ञासु महाराज, श्री रामायण कुटी चित्रकूट के मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
महाराज ने बताया कि वृंदावन में गोवर्धननाथ साक्षात नारायण के रूप में विराजमान हैं, जो लगभग सात कोस यानी करीब 21 किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं। यमुना जी को प्रत्यक्ष देवी के रूप में पूजा जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के कहने पर व्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा आरंभ की, जिससे देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने घोर वर्षा कर दी। लगातार सात दिन और सात रात मूसलाधार बारिश के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर व्रजवासियों को उसके नीचे आश्रय दिया, जिससे इंद्र का अहंकार समाप्त हुआ।
कथा के दौरान महाराज ने विभिन्न भक्ति प्रसंगों के माध्यम से बताया कि गृहस्थ जीवन के कार्य करते हुए भी भगवान की भक्ति संभव है और यही जीवन का सच्चा मार्ग है।
श्री राम कथा समिति के अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ‘जीतू’ ने बताया कि कार्यक्रम के समापन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर श्री राम कथा समिति के प्रेम किशोर श्रीवास्तव, विजय ओमर सहित अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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