आवर्तनशील खेती के साथ नशे के विरुद्ध अभियान आज़ादी के महोत्सव में गूंजा संदेश खेती को मानो राष्ट्रीय कार्य
आज़ादी का महोत्सव ग्राम पांडुई जब खेत की मिट्टी में मनाया गया तो स्वतंत्रता का अर्थ एक नए रूप में सामने आया...
बांदा। आज़ादी का महोत्सव ग्राम पांडुई जब खेत की मिट्टी में मनाया गया तो स्वतंत्रता का अर्थ एक नए रूप में सामने आया। किसानों के साथ आज़ादी का महोत्सव मनाया गया।
कार्यक्रम में वृक्षारोपण, प्राकृतिक खेती और आवर्तनशील खेती को केंद्र में रखते हुए किसानों को आत्मनिर्भर और सम्मानपूर्ण जीवन की दिशा में आगे बढ़ने और बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को रोकने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में संजीवनी भारत ट्रस्ट के सचिव अरुण निगम ने अपने संबोधन में कहा कि जिस तरीके से रासायनिक खेती मानव जीवन के लिए खतरा पैदा कर रही है ठीक उसी प्रकार नशे की प्रवृत्ति आने वाली पीढ़ी को खोखला कर देगी गोष्ठी को संबोधित करते हुए पंकज बागवान ने कहा कि आज़ादी के महोत्सव को हर वर्ष किसानों के खेत में मनाने का उद्देश्य किसान को यह एहसास कराना है कि उसका श्रम भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी अन्य राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगे व्यक्ति का।उन्होंने कहा कि हा रासायनिक खेती को नशे से खतरनाक बताया पेड़ लगाना, पानी बचाना, मिट्टी को बचाना और अन्न पैदा करना—ये सभी राष्ट्र सेवा के कार्य हैं खेती फाउंडेशन ट्रस्ट की अध्यक्षता कर रहे किसान नवल किशोर ने किसानों से आह्वान किया कि वे केवल एक फसल और बाजार पर निर्भर रहने के बजाय आवर्तनशील खेती की योजना बनाकर अपने खेत को अधिक आत्मनिर्भर बनाएं।
कार्यक्रम में श्रीमती आराधना प्रधान ने अपनी कालजई कविता जिसकी जमीन नहीं उसका आसमान नहीं से किसानों का दिल जीत लिया शैल कन्या इंटर कॉलेज के प्रबंधक प्रवीण निगम, समाजसेवी अमितेंद्र भाई, सेवानिवृत्त कर्नल डी.सी. श्रीवास्तव, डॉ. चंद्रपाल एवं युवा किसान शिवाकांत, मदनमोहन, शैलेन्द्र सिंह बुंदेला सहित अरबई से नवोदित किसान आशीष प्रधान ने अपने अनुभवों को साझा किया युवा किसान आशीष अपनी सभी आगंतुक किसानों का आभार व्यक्त किया।
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