मदर्स डे स्पेशल... संघर्ष की गोद में पला सपना, मां की तपस्या से बेटा बना आईएएस
कहते हैं कि मां केवल जन्म नहीं देती, बल्कि अपने बच्चों के सपनों को भी आकार देती है। मदर्स डे के अवसर पर चित्रकूट के युवा आईएएस अधिकारी...
अर्पित कुमार यादव की सफलता के पीछे मां के त्याग, मेहनत और संघर्ष की भावुक कहानी
चित्रकूट। कहते हैं कि मां केवल जन्म नहीं देती, बल्कि अपने बच्चों के सपनों को भी आकार देती है। मदर्स डे के अवसर पर चित्रकूट के युवा आईएएस अधिकारी अर्पित कुमार यादव की कहानी हर उस मां को समर्पित है, जिसने कठिन परिस्थितियों में भी अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए हर दर्द सहा।
चित्रकूट के साधारण परिवार से निकलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) तक पहुंचने वाले अर्पित कुमार की सफलता के पीछे उनकी मां का अथाह संघर्ष, त्याग और अटूट विश्वास छिपा है। आर्थिक तंगी, सामाजिक चुनौतियां और तमाम अभावों के बावजूद उनकी मां श्रीमती मीरा यादव पत्नी स्व. राममूरत यादव निवासी अहिरनपुरवा गल्ला मण्डी के पास कर्वी ने कभी बेटे की पढ़ाई रुकने नहीं दी।
अर्पित कुमार बताते हैं कि बचपन में कई बार घर की परिस्थितियां इतनी कठिन थीं कि पढ़ाई छोड़ने तक की नौबत आ गई थी, लेकिन उनकी मां ने हर बार उन्हें हिम्मत दी। उन्होंने खुद तकलीफें सह लीं, लेकिन बेटे की किताबों और पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी। अर्पित कहते हैं कि उनकी मां हमेशा कहती थीं “मुश्किलें जितनी बड़ी होंगी, सफलता उतनी ही बड़ी मिलेगी।” मां के इन्हीं शब्दों ने उन्हें हर संघर्ष में आगे बढ़ने की ताकत दी।
यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता पाने से पहले अर्पित कुमार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। तैयारी के दौरान तनाव और असफलताओं के क्षण भी आए, लेकिन उनकी मां हर समय ढाल बनकर खड़ी रहीं। उन्होंने बेटे का मनोबल टूटने नहीं दिया और लगातार मेहनत करने के लिए प्रेरित करती रहीं।
अर्पित की सफलता के बाद आज पूरा चित्रकूट उन पर गर्व करता है। गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि यह केवल बेटे की नहीं, बल्कि एक मां की तपस्या की जीत है।
मदर्स डे पर अर्पित कुमार ने अपनी सफलता का पूरा श्रेय मां को देते हुए कहा कि “अगर मां का विश्वास और त्याग नहीं होता तो शायद मैं यहां तक कभी नहीं पहुंच पाता। मेरी मां ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।”
उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि माता-पिता के संघर्ष और सपनों का सम्मान करें, क्योंकि मां की दुआ और मेहनत से बड़ी कोई ताकत नहीं होती।
मदर्स डे के मौके पर अर्पित कुमार और उनकी मां की कहानी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव के लोग इसे संघर्ष, संस्कार और मां की ममता की मिसाल बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं उनके छोटे भाई आलोक कुमार यादव बी0टेक करने के बाद आईएएस की तैयारी में पूरे मनोयोग से जुटे हैं। तैयारी में उनके बडे भाई आईएएस अर्पित यादव का मार्गदर्शन उन्हें निरन्तर सफलता की ओर बढने में मददगार साबित हो रहा है।
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