कोरोना विजेताओं के साथ यह नाइंसाफी क्यों ?

कोरोना विजेताओं के साथ यह नाइंसाफी क्यों ?

कोरोना संक्रमित मरीज जब पाया जाता है तो प्रशासन बेहद सक्रिय नजर आता है।उसके घर से लेकर गांव या मोहल्ले को सैनिटाइज किया जाता और जब वह अस्पताल से स्वस्थ होकर निकलता है तो उसे कोरोना विजेता का खिताब देकर फूल मालाओं से स्वागत करते हुए विदा किया जाता है। उस समय डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मि पीपीई किट से लैस होते हैं और वहां जिले का कोई भी अधिकारी उन्हें शाबाशी देने के लिए मौजूद नहीं रहता है एक और तो उन्हें स्वस्थ और कोरोना विजेता बताया जाता है दूसरी तरफ पीपीई किट पहनकर जब उन्हें विदा किया जाता है तो मरीजों के मन में  सकरात्मक के बजाय नकारात्मक स्थिति पैदा होती है ।

वैश्विक महामारी कोरोना कोविड-19 के कारण आज समूचे विश्व में दहशत का माहौल है।ऐसे में जो भी मरीज संक्रमित पाया जाता है तो उसके परिवार व मित्रों को भी क्वॉरेंटाइन किया जाता है और जहां वह रहता है वहां मोहल्ले और उसके घर को भी सैनिटाइज करके पूरा इलाका सील कर दिया जाता है। कोविड-19 के गाइडलाइन के अनुसार यह कार्रवाई होने से संक्रमित व्यक्ति और उसका परिवार दहशत के माहौल में रहता है।संक्रमित मरीज को कोविड-19 अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। वहां से जब ठीक होकर  मरीज बाहर निकलता है ।

तो उन्हें कौरोना विजेता की उपाधि देकर प्रमाण पत्र और फूल मालाओं से सम्मानित किया जाता है बल्कि तालियां बजाकर में डिस्चार्ज किया जाताहै ऐसा करके स्वास्थ्य विभाग स्वस्थ होकर जाने वाले मरीज को उत्साहित करते हुए उनका हौसला बढ़ाता है।

यहां एक बड़ी चूक नजर आती है क्योंकि जब कोरोना विजेता को डिस्चार्ज किया जाता है उस समय भी डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी मरीज से दूरी बनाने के लिए पीपीई किट पहने रहते हैं ऐसे में मरीज उत्साहित होने के बजाय अपने आप को नकारात्मक मानता है।अगर वह स्वस्थ हो गया है तो फिर उससे दूरी क्यों वहीं दूसरी ओर कोरोना  विजेताओं को अस्पताल से डिस्चार्ज  करते समय प्रोत्साहन कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल होने का प्रावधान है लेकिन ज्यादातर अस्पतालों में  स्वास्थ्य कर्मचारी ही उन्हें विदा करते हैं।

स्वस्थ हो चुके मरीजों को यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि वह कोरोना संक्रमण से मुक्त हो गया और इस विश्वास को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि उसकी उपेक्षा न की जाए लेकिन अस्पताल से डिस्चार्ज करते समय आयोजित प्रोत्साहन कार्यक्रम में जिस तरह से पीपीई किट पहनकर स्वास्थ्य कर्मी उसे विदा करते हैं उससे निश्चित रूप से उनके मन में नकारात्मक भावना पैदा होती है जबकि उनके अंदर सकारात्मक भावना होनी चाहिए। कोई भी मरीज जब स्वस्थ होकर अपने घर जाता है तो उसका हौसला बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के मुख्य अधिकारियों के अलावा जिले के किसी वरिष्ठ अधिकारी को भी सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए प्रोत्साहन कार्यक्रम में हिस्सा लेना चाहिए ऐसा होने से स्वस्थ होने वाले मरीजों का हौसला बढ़ेगा और उनके मन से नकारात्मक की जगह सकारात्मक भावना पैदा होगी।