कार्यशाला में सम्मानित किए गए समाजसेवी डॉ. प्रभाकर सिंह
बुंदेलखंड क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, जल एवं पर्यावरण संरक्षण तथा हरीतिमा संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से...
चित्रकूट। बुंदेलखंड क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, जल एवं पर्यावरण संरक्षण तथा हरीतिमा संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुंदेलखंड जोन वन मुख्यालय झांसी में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में क्षेत्र में जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण एवं हरीतिमा संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले संस्थाओं एवं प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
कार्यशाला के मुख्य अतिथि डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, मंत्री स्वतंत्र प्रभार, वन एवं पर्यावरण, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग रहे। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी को आवश्यक बताते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देना होगा। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक वृक्षारोपण के साथ कृषि वानिकी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे किसानों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने इको टूरिज्म एवं पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि प्राकृतिक क्षेत्रों को विकसित कर स्वच्छ एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाए। जिससे पर्यटन के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास के अवसर भी बढ़े।
मंत्री ने ग्राम चौपालों के माध्यम से एग्रो फॉरेस्ट्री के प्रति ग्रामीणों को जागरूक एवं प्रेरित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए वन विभाग, स्वयंसेवी संस्थाओं, ग्रामीण समुदायों एवं अन्य संबंधित विभागों को मिलकर निरंतर कार्य करना होगा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे स्वयंसेवी संस्थाओं एवं वन विभाग से जुड़े प्रतिनिधियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। कार्यक्रम के दौरान विकास पथ सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर सिंह को जलवायु परिवर्तन एवं हरीतिमा संवर्धन के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। कार्यशाला के दौरान बुंदेलखंड क्षेत्र में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए विभिन्न विभागों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को पांच समूहों में विभाजित किया गया। प्रत्येक समूह ने अपने अनुभव एवं क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर एक समन्वित खाका तैयार किया।
कार्यशाला में देवाशीष जेना प्रभागीय वनाधिकारी महोबा, पंकज कुमार शुक्ला प्रभागीय वनाधिकारी बांदा, अरविंद कुमार प्रभागीय वनाधिकारी हमीरपुर, प्रदीप सिंह प्रभागीय वनाधिकारी उरई, अभिमन्यु सिंह सर्वोदय सेवा संस्थान, राजेंद्र निगम लोकपथ चौरिटेबल ट्रस्ट, पीके शुक्ला लघु सिंचाई विभाग चित्रकूट, बलजीत बहादुर सिंह भूमि संरक्षण अधिकारी आदि मौजूद रहे।
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