जिला जेल में लीगल एंड क्लीनिक का सचिव ने किया निरीक्षण

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष जनपद न्यायाधीश शेषमणि शुक्ला के मार्गदर्शन में गुरुवार को जिला कारागार जिला विधिक सेवा...

Jun 12, 2026 - 10:47
Jun 12, 2026 - 10:48
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जिला जेल में लीगल एंड क्लीनिक का सचिव ने किया निरीक्षण

मानव तस्करी पर किया जागरुक

चित्रकूट। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष जनपद न्यायाधीश शेषमणि शुक्ला के मार्गदर्शन में गुरुवार को जिला कारागार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव इला चौधरी ने औचक निरीक्षण  एवं मानव तस्करी एवं यौन उत्पीडन विषय पर विधिक साक्षरता जागरूकता शिविर का आयोजन किया।

निरीक्षण के दौरान जिला कारागार में संचालित लीगल एड क्लीनिक में अनुरक्षित समस्त पंजिकाओं को देखा। पंजिकाओं की प्रविष्टियां नियमानुसार अंकित पायी गयी। लीगल एड क्लीनिक में नियुक्त पैरालीगल वालेण्टियर्स को निर्देशित किया गया कि यदि कोई बन्दी अपने मुकदमें की पैरवी के लिए व्यक्तिगत अधिवक्ता करने में अक्षम है तो नियमानुसार पत्राचार करते हुये अधीक्षक जिला कारागार के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से बन्दी के मुकदमें की पैरवी के लिए अधिवक्ता प्राप्त करा सकते हैं। इसी क्रम में शिविर में सचिव ने बताया कि मानव तस्करी और यौन उत्पीड़न गंभीर अपराध और मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं। मानव तस्करी का अर्थ लोगों को बहला फुसलाकर, डराकर या जबरन शोषण जैसे वेश्यावृत्ति या बंधुआ मजदूरी के लिए उपयोग करना है। इसे आधुनिक युग की गुलामी भी कहा जाता है। इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए संवैधानिक प्रावधान, आपराधिक कानून और कई विशेष अधिनियम लागू किए गए हैं। कुलदीप सिंह सहायक लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल द्वारा बताया गया कि कार्यस्थल, सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी व्यक्ति द्वारा महिलाओं का यौन उत्पीडन नहीं किया जाना चाहिए। यौन उत्पीडन एक सामाजिक बुराई के साथ व्यक्ति की गरिमा, मानसिक शान्ति और सुरक्षा के अधिकारों का गम्भीर उलंघन भी है। भारतीय न्याय संहिता के अन्तर्गत यौन उत्पीडन को दण्डनीय अपराध है। योगेन्द्र सिंह सहायक लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल द्वारा बताया गया मानव तस्करी या व्यक्तियों का अवैध व्यापार गैरकानूनी अपराध होता है। नौकरी या व्यापार का लालच देकर लोगों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर फंसाया जाता है। कारखानों, खेतों या घरों में बिना पैसे दिये बन्धुआ मजदूर बनाकर जबरजस्ती काम कराना भी इसी अपराध की श्रेणी में आता है। भारतीय कानून में आईपीसी की धारा 370 और 370ए के तहत मानव तस्करी एक संगीन अपराध माना गया है और इसके लिये कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। स्वाती तिवारी सहायक लीगल एड डिफेन्स काउन्सिल द्वारा बताया गया कि मानव तस्करी और यौन उत्पीडन एक दूसरे से जुडे हुये विषय ही हैं। मानव तस्करी के पीछे एक बडा कारण पीडित व्यक्ति का यौन उत्पीडन होता है। इस अपराध का मुख्य कारण गरीबी और अशिक्षा है। इसलिये इससे लडने के लिये हम सभी को शिक्षा पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। इस अवसर पर अंशुमान यादव अतिरिक्त सिविल जज सीडि, कुश कुमार सिंह अधीक्षक जिला कारागार, सुनील कुमार वर्मा जेलर, कौशलेन्द्र मिश्रा, प्रभू प्रताप सिंह, बृजकिशोरी उपकारापाल उपस्थित रहे।

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