बाल श्रम रोकने को विभाग उठाएं प्रभावी कदम : सीडीओ

सीडीओ डीपी पाल की अध्यक्षता में बाल श्रम प्रतिषेध अधिनियम के संबंध में कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि बाल श्रम एक सामाजिक बुराई है...

Jun 12, 2026 - 10:59
Jun 12, 2026 - 11:00
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बाल श्रम रोकने को विभाग उठाएं प्रभावी कदम : सीडीओ

बाल श्रम अधिनियम 1986 व संशोधित बाल एवं किशोर श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम 2016 की दी संक्षिप्त जानकारी’

चित्रकूट। सीडीओ डीपी पाल की अध्यक्षता में बाल श्रम प्रतिषेध अधिनियम के संबंध में कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि बाल श्रम एक सामाजिक बुराई है जो बच्चों की शिक्षा, कैरियर, स्वास्थ्य और उनकी मनोस्थिति पर अत्यन्त प्रतिकूल प्रभाव डालती है। साथ ही बच्चों के विरूद्ध हिंसा और अपराधों को भी जन्म देती है। 14 वर्ष से कम आयु वाले श्रमिकों को बाल श्रमिक तथा 14 से 18 वर्ष के बीच के आयु वाले श्रमिकों को किशोर श्रमिक माना जाता है। 14 वर्ष से कम आयु होने तक बाल श्रम पूर्णतः प्रतिबन्धित है तथा 14 से 18 वर्ष तक के किशोरों को अधिनियम के प्राविधानों के अनुसार निर्धारित नियम एवं शर्तों पर कार्य करने की अनुमति है।

अधिनियम के प्राविधानों के अन्तर्गत बाल श्रमिक नियोजित पाये जाने पर न्यूनतम 6 माह से लेकर 2 वर्ष तक के कारावास की सजा या न्यूनतम 20 हजार से लेकर 50 हजार तक का अर्थदण्ड या दोनो से दण्डित करने का प्राविधान है। सेवायोजक द्वारा उक्त की पुनरावृत्ति करने पर सेवायोजक के विरूद्ध एक वर्ष से लेकर तीन वर्ष तक की कारावास की सजा का भी प्राविधान है। माइन्स, विस्फोटक पदार्थों या ज्वलनशील पदार्थो आदि वाले व्यवसाय को छोडकर अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में कुछ शर्तों के साथ किशोर श्रमिको का नियोजन हो सकता है लेकिन उनकी पढ़ाई बाधित नही होनी चाहिये। लगातार तीन घण्टे से अधिक कार्य नहीं लिया जा सकता है एवं एक घण्टे के विश्राम के साथ पुनः तीन घण्टे का कार्य लिया जा सकता है। सप्ताह में एक दिन का साप्ताहिक अवकाश देना अनिवार्य है। तथा ओवरटाइम नही कराया जा सकता है। किशोर श्रमिक नियोजित करने पर सेवायोजकों को नियोजन के 30 दिन के अन्दर स्थानीय श्रम कार्यालय में नाम, पता व कार्य का प्रकार आदि विषयक सूचना देना आवश्यक होता है। अधिनियम के अन्तर्गत वर्ष 2025-26 में जनपद में बाल श्रम उन्मूलन करने के तहत 73 सेवायोजक प्रतिष्ठानों के किये गये निरीक्षण में 87 बाल श्रमिक या किशोर नियोजित करने वाले 73 सेवायोजकों के विरूद्ध मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में वाद पंजीकृत कराया गया है।

बाल श्रम की प्रभावी कार्यवाही के लिए शासन द्वारा श्रम विभाग के अधिकारियों के अतिरिक्त जनपद में तैनात समस्त परगना मजिस्ट्रेट, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, समस्त खण्ड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अधिसूचना निर्गत करके शासन द्वारा निरीक्षक घोषित किया गया है। बाल श्रम नियोजन सम्बन्धी जानकारी प्राप्त होने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, श्रम विभाग के पेन्सिल पोर्टल, पुलिस हेल्पलाइन 112, अथवा नजदीकी श्रम विभाग के कार्यालय पर सूचना दे सकते है।

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