शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों से रूबरू हुईं छात्राएं, कथक के जरिए जीवंत हुई भारतीय संस्कृति
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उ.प्र.) एवं पी.एम. श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, बाँदा के संयुक्त तत्वावधान में...
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में 'कथक नृत्य: व्याख्यान सह-प्रदर्शन' का भव्य आयोजन
बाँदा। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उ.प्र.) एवं पी.एम. श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, बाँदा के संयुक्त तत्वावधान में विद्यालय परिसर में एक दिवसीय 'कथक नृत्य: व्याख्यान सह-प्रदर्शन' का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्राओं को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा और उसके तकनीकी पक्षों की गहन जानकारी दी गई।
कथा से उपजा है कथक: सुश्री अनुपमा त्रिपाठी
कार्यक्रम की मुख्य कलाकार सुश्री अनुपमा त्रिपाठी ने अपनी प्रस्तुति और व्याख्यान से छात्राओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने बताया कि 'कथक' शब्द की उत्पत्ति 'कथा' शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है 'कथा कहना'। प्राचीन काल में कथावाचक नृत्य और संगीत के माध्यम से पौराणिक कहानियों को जन-जन तक पहुँचाते थे, जो कालान्तर में कथक के रूप में विकसित हुआ।
प्रमुख घरानों और तकनीकी पक्षों का ज्ञान
सुश्री त्रिपाठी ने छात्राओं को कथक के तीन प्रमुख घरानों— लखनऊ, जयपुर और बनारस की विशिष्टताओं से अवगत कराया। उन्होंने नृत्य के तकनीकी अंगों का सजीव प्रदर्शन करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
- तत्कार: पैरों के सधे हुए संचालन (पद-संचालन) की कला।
- हस्तक व अंग-संचालन: हाथों और शरीर की विभिन्न मुद्राओं का महत्व।
- भाव एवं अभिव्यक्ति: उन्होंने समझाया कि कैसे एक कलाकार बिना शब्द बोले, केवल अपनी भंगिमाओं और 'आंगिक संचालन' से पूरी कहानी दर्शकों के समक्ष जीवंत कर सकता है।
सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती निमिषा रंजन ने इस सफल आयोजन पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा, "ऐसे आयोजनों से छात्राओं में न केवल कला के प्रति रुचि जागृत होती है, बल्कि उन्हें अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को गहराई से समझने का अवसर भी मिलता है।"
उपस्थिति:
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की प्रधानाचार्या, नृत्य प्रशिक्षक, समस्त शिक्षक गण और बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं। छात्राओं के भारी उत्साह और कला के प्रति उनकी जिज्ञासा ने कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।
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