बाँदा में प्रोफेसर डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल का अभिनंदन समारोह आयोजित: '46 वर्षों बाद: अंत नहीं आरंभ'

तिंदवारी रोड स्थित होटल 'रॉयल ऑर्बिट' में प्रोफेसर (डॉ.) अश्विनीकुमार शुक्ल की सेवानिवृत्ति के अवसर पर '46 वर्षों बाद : अंत नहीं आरंभ' शीर्षक से संस्मरणात्मक...

Jul 21, 2026 - 15:52
Jul 21, 2026 - 15:53
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बाँदा में प्रोफेसर डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल का अभिनंदन समारोह आयोजित: '46 वर्षों बाद: अंत नहीं आरंभ'

बाँदा (उत्तर प्रदेश)। तिंदवारी रोड स्थित होटल 'रॉयल ऑर्बिट' में प्रोफेसर (डॉ.) अश्विनीकुमार शुक्ल की सेवानिवृत्ति के अवसर पर '46 वर्षों बाद : अंत नहीं आरंभ' शीर्षक से संस्मरणात्मक चर्चा एवं अभिनंदन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। उनके सुपुत्र इंजीनियर आशुतोष शुक्ल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों, सैन्य अधिकारियों और प्रशासनिक हस्तियों ने भाग लिया।

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के पूर्व कला संकायाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय एवं पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रंजना उपाध्याय रहे। अपने ओजस्वी उद्बोधन में प्रोफेसर उपाध्याय ने डॉ. शुक्ल के लेखन सामर्थ्य, प्रांजल भाषा प्रयोग, साहित्यानुराग और संपादन कला पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने डॉ. शुक्ल को एक आदर्श शिक्षक, रचनाकार और अनुशासित व्यक्तित्व का प्रतीक बताया।

​समारोह की अध्यक्षता बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. जगन्नाथ पाठक ने की। उन्होंने डॉ. शुक्ल की भाषिक विद्वता, सामाजिक सरोकारों और संगठनात्मक क्षमताओं की सराहना की। महाराष्ट्र के अमलनेर से आए विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. सुरेश माहेश्वरी ने डॉ. शुक्ल के साहित्यिक अवदान और उनके साथ की गई साहित्यिक यात्राओं के अनुभव साझा किए।



​कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डॉ. शुक्ल के 46 वर्षों के जीवन-वृत्त पर आधारित 20 मिनट की डॉक्यूमेंट्री (वृत्तचित्र) का प्रदर्शन रहा, जिसे उनके अभिन्न मित्र सेवानिवृत्त इंजीनियर अरुणकुमार तिवारी (लखनऊ) ने तैयार किया था।

​समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और फतेहपुर के साहित्यकार मधुसूदन दीक्षित द्वारा प्रस्तुत सरस्वती-वंदना से हुआ। मंच का कुशल संचालन अरुणकुमार तिवारी और मनोजकुमार 'मृदुल' ने संयुक्त रूप से किया।

​उल्लेखनीय है कि डॉ. शुक्ल ने मात्र 17 वर्ष की उम्र में भारतीय वायुसेना के माध्यम से राष्ट्रसेवा शुरू की थी। 17 वर्ष 7 महीने की सैन्य सेवा (31 जुलाई 1998 तक) के पश्चात उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा और शिक्षण व साहित्य सृजन को अपना जीवन समर्पित कर दिया। 46 वर्षों के इस लंबे और अनुशासित सफर के समापन पर वक्ताओं ने उनके अद्वितीय योगदान की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

​समारोह में डॉ. शुक्ल के वायुसेना काल के साथी—सुरेंद्र सिंह धाकरे (गाजियाबाद), रवि सक्सेना (आगरा), अश्विनीकुमार द्विवेदी (कानपुर), मदनगोपाल (गोरखपुर) सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए सहकर्मी उपस्थित रहे।

​इसके अलावा कूट अध्यक्ष डॉ. बी.डी. पांडेय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (बाँदा) के जिला प्रचारक अनुराग, शासकीय अधिवक्ता सत्यदेव अवस्थी, सेवानिवृत्त आयकर आयुक्त अरविंदकुमार शुक्ल, बी.पी. शुक्ल (वरिष्ठ अधिवक्ता), पूर्व अपर निदेशक डॉ. राजेशमोहन दीक्षित, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक त्रिपाठी 'जीतू' तथा पं. जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय व अतर्रा महाविद्यालय के विभिन्न विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

​कार्यक्रम के अंत में आयोजक इंजीनियर आशुतोष शुक्ल और उनकी बहन आकांक्षा दीक्षित ने सभी आगत अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिसके उपरांत प्रीतिभोज के साथ समारोह संपन्न हुआ।

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