जानकीकुण्ड चिकित्सालय में 28 से 30 जुलाई तक अस्थि रोग निदान शिविर, रीढ़ के ऑपरेशन और कैलिपर्स मिलेंगे निःशुल्क
परमहंस संत रणछोड़दास जी महाराज द्वारा स्थापित संस्थान श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित जानकीकुण्ड चिकित्सालय में प्रतिवर्ष की भांति...
गुरु पूर्णिमा पर सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट की विशेष पहल; डॉ. मनोज पटेल की टीम देगी सेवाएं, चित्रकूट क्षेत्रवासियों से लाभ उठाने की अपील
चित्रकूट। परमहंस संत रणछोड़दास जी महाराज द्वारा स्थापित संस्थान श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित जानकीकुण्ड चिकित्सालय में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में 37वें जटिल अस्थि रोग निदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है। 28 जुलाई से 30 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस शिविर में सुप्रसिद्ध डॉ. मनोज पटेल एवं उनकी टीम तथा जानकीकुण्ड चिकित्सालय के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. महेश होसामने मरीजों को अपनी विशेषज्ञ सेवाएं प्रदान करेंगे।
शिविर में उपलब्ध होंगी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं
तीन दिवसीय इस शिविर के दौरान जटिल अस्थि रोगों के निदान के साथ-साथ गंभीर मामलों में ऑपरेशन भी किए जाएंगे।
- जटिल ऑपरेशन: घुटनों का प्रत्यारोपण (Knee Replacement), आधुनिक तकनीक द्वारा रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन, हड्डियों की टूट-फूट का इलाज एवं जटिल शल्य चिकित्सा।
- विकलांगता उपचार: पोलियो के कारण हुई शारीरिक विकलांगता का इलाज।
- निःशुल्क उपकरण वितरण: जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क कैलिपर्स एवं अन्य सहायक उपकरण वितरित किए जाएंगे।
जरूरी दस्तावेज: निःशुल्क कैलिपर्स व उपकरण प्राप्त करने के लिए मरीजों को अपना निवास प्रमाण पत्र, विकलांगता प्रमाण पत्र और दो पासपोर्ट साइज फोटो साथ लाना अनिवार्य है।
1987 से जारी है मानव सेवा का यह पुनीत मार्ग
शिविर की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं निदेशक डॉ. इलेश जैन ने बताया कि पूर्व में बड़ी संख्या में लोग पोलियो से ग्रसित रहते थे। असहाय और गरीब वर्ग को बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से ट्रस्ट के प्रथम अध्यक्ष स्वर्गीय अरविंद भाई मफ़तलाल एवं स्वर्गीय पद्मश्री डॉ. बी. के. जैन ने 1987 में पहले पोलियो शिविर की शुरुआत की थी।
जानकीकुण्ड चिकित्सालय की वरिष्ठ जनरल सर्जन डॉ. पूनम आडवाणी ने बताया कि भारत सरकार के टीकाकरण अभियान के फलस्वरूप मार्च 2014 में देश को पोलियो मुक्त घोषित कर दिया गया। इसके बाद से इस शिविर का स्वरूप बदलकर 'जटिल अस्थि रोग निदान शिविर' कर दिया गया, ताकि क्षेत्र के लोगों को हड्डी से जुड़ी अन्य गंभीर बीमारियों से राहत दिलाई जा सके।
निदेशक डॉ. इलेश जैन ने की अपील
निदेशक डॉ. इलेश जैन ने चित्रकूट एवं आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के नागरिकों से अपील की है कि जिन लोगों को भी हड्डी या जोड़ संबंधी कोई समस्या या बीमारी है, वे इस शिविर में आकर विशेषज्ञों को दिखाएं और संस्थान द्वारा दी जा रही सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
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