नानाजी ने दिया ग्राम स्वावलंबन, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण का अद्वितीय मॉडल
भारत के ग्रामीण क्षेत्रों को लेकर लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि गांव केवल गरीबी, अशिक्षा और पिछडे़पन के प्रतीक हैं लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ...
आरएसएस के कर्मयोगी नानाजी देशमुख ने चित्रकूट से शुरू की ग्रामोदय की ऐतिहासिक यात्रा
चित्रकूट। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों को लेकर लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि गांव केवल गरीबी, अशिक्षा और पिछडे़पन के प्रतीक हैं लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं प्रखर राष्ट्रचिंतक नानाजी देशमुख ने इस सोच को बदलने का कार्य किया। उन्होंने गांवों में केवल समस्याएं नहीं देखीं, बल्कि वहां भारत की आत्मा और राष्ट्र निर्माण की अपार संभावनाएं देखीं।
भारतीय जनसंघ के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल रहे नानाजी देशमुख ने सक्रिय राजनीति के शिखर पर पहुंचने के अवसरों को त्यागकर समाजसेवा और ग्रामोदय का मार्ग चुना। आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद उन्होंने 60 वर्ष की आयु में राजनीति से संन्यास लेकर स्वयं को पूर्णतः ग्रामीण पुनर्निर्माण के कार्य में समर्पित कर दिया।
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