डेढ़ साल के मासूम के गले से त्रिशूल आकार का लॉकेट निकाला, डॉक्टर ने बचाई जान
रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर एवं इंदिरा नगर स्थित कैलाश मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एंड ईएनटी सेंटर के संचालक नाक-कान-गला...
बिना चीरे एंडोस्कोपिक पद्धति से हुआ जटिल ऑपरेशन
कई अस्पतालों से निराश होने के बाद बाँदा में मिला जीवनदान
बांदा। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर एवं इंदिरा नगर स्थित कैलाश मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एंड ईएनटी सेंटर के संचालक नाक-कान-गला एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र सिंह ने अपनी कुशलता का परिचय देते हुए डेढ़ साल के मासूम की जान बचा ली। नरैनी क्षेत्र के धोबन पुरवा निवासी मयंक पुत्र स्व. मनीज के गले की खाने की नली में त्रिशूल आकार का पीतल का लॉकेट फंस गया था, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई थी।
परिजनों के अनुसार बच्चे की मां जयंती उसे छतरपुर और झांसी के कई अस्पतालों में लेकर गईं, लेकिन जटिल ऑपरेशन होने के कारण डॉक्टरों ने उपचार करने में असमर्थता जताई। इसके बाद गुरुवार को बच्चे को बांदा स्थित कैलाश हॉस्पिटल लाया गया, जहां डॉ. भूपेंद्र सिंह ने उसे भर्ती कर लिया।
डॉ. सिंह ने बताया कि लॉकेट दोनों ओर से नुकीला होने के कारण खाने की नली में बुरी तरह फंस गया था और नली को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा था। ऑपरेशन के दौरान नली फटने और बच्चे की जान जाने का खतरा भी बना हुआ था। पूरी तैयारी के बाद शुक्रवार को बिना किसी चीरे के दूरबीन (एंडोस्कोपिक) पद्धति से करीब डेढ़ घंटे तक चले जटिल ऑपरेशन के बाद लॉकेट सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया।
ऑपरेशन में डॉ. पंकज (एनेस्थीसिया), डॉ. अरुण (ईएमओ) सहित ओटी स्टाफ मोहित, आशुतोष, नीरज और पूजा का विशेष सहयोग रहा। सफल ऑपरेशन के बाद बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ बताया जा रहा है। परिजनों ने डॉक्टर और पूरी टीम का आभार व्यक्त किया है।
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