अयोध्या में लाठीचार्ज के बाद जब गोली चली तो सांसे थम गई थी 

बांदा की अस्थाई जेल से लेकर फायर ब्रांड नेत्री उमा भारती को लेकर फरार हुए युवा कार्यकर्ता राजकुमार शिवहरे जब अयोध्या पहुंचे और उमा भारती के जत्थे के साथ कार सेवा के लिए आगे बढ़े तो पहले लाठियां बरसी और फिर गोलियां बरसने लगी...

अयोध्या में लाठीचार्ज के बाद जब गोली चली तो सांसे थम गई थी 

इस साहसी युवक ने हिम्मत नहीं हारी और जय श्री राम उद्घोष करते हुए आगे बढ़ता रहा। गोली चलने पर सांसे थम गई थी फिर भी वह पीछे नहीं हटा तभी भगदड़ मची और उसमें घायल होकर वह अस्पताल पहुंच गया।

1 नवंबर 1990 की घटना को याद करते हुए राजकुमार शिवहरे ने बताया कि उमा भारती को लेकर हम लोग लालगंज बछरावां और रायबरेली होते हुए अयोध्या पहुंच गए लेकिन जगह जगह वेरी कैटिंग लगी होने से हमें कई किलोमीटर दूर रोक दिया गया। लेकिन बड़ी संख्या में लोग सड़क के बजाय खेतों से होकर राम जन्म भूमि की ओर बढ़ रहे थे। इसलिए हमने अपनी  मारुति वैन को भी खेतों के रास्ते मनीराम छावनी तक पहुंचाया। यहां दोपहर में लगभग एक बजे हम लोग पहुंच गए थे। वहां एक सभा चल रही थी उमा भारती के वहा पहुंचते ही लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई।तभी उन्होंने मंच में पहुंचकर मीडिया के सामने मुझे बुलाया और बताया कि इसी लड़के ने मुझे बांदा से फरार कराने में मदद की। उमा जी ने कहा कि इसने मुझे अयोध्या तक पहुंचाने मैं अपनी जान की बाजी लगा दी।

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उस घटना के बाद मीडिया में मेरा भी नाम सामने आया। राजकुमार ने बताया कि उसी दिन एक बैठक हुई। बैठक में विश्व हिंदू परिषद के अशोक सिंघल ,भाजपा के विनय कटियार और उमा भारती जैसे कई दिक्कज नेता मौजूद थे, जिसमें तय हुआ कि कार सेवा के लिए अगले दिन सभी कार्यकर्ता कूच करेंगे। इसके लिए अलग-अलग चार जत्थे बनाए गए थे। इनमें एक एक जत्थे का नेतृत्व अशोक सिंघल, विनय कटियार उमा भारती और वेदांती जी को सौंपा गया ।

मैं उमा भारती के दस्ते में शामिल था। अगले दिन लाखों की तादाद में कारसेवक जय श्री राम का नारा लगाते हुए आगे बढ़ने लगे। क्योंकि आंसू गैस छोड़ने की संभावना थी इसलिए सभी कार्यकर्ताओं को प्याज रखने को कहा गया था।आंसू गैस छोड़ने के बाद प्याज का रस आंखों में डालने से अश्रु गैस का असर नहीं होता।साथ ही सभी को गले में एक एक साफी गीली करके रखने को  कहा गया  था।इस तरह कार्यकर्ता पूरी तैयारी से आगे बढ़ रहे थे ।क्योंकि 30 अक्टूबर को चली गोली में कई कार्यकर्ता मारे गए थे।जब हम आगे बढ़ रहे थे तभी बैरियर पर तैनात एसडीएम अनिल कुमार दमेले को देखकर मैं दंग रह गया और वह भी मुझे देख कर आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने कहा कि तुम यहां कहां से आ गए वापस चले गए क्योंकि गोली चलने वाली है।लेकिन मैंने कहा कि मैं उमा जी के साथ आया हूं और मैं अब पीछे हटने वाला नहीं हूं ।इसी बीच वहां महिला पुलिस की एक टोली पहुंची और उमा भारती को हिरासत में ले लिया।फिर भी हम लोग हनुमानगढ़ी की ओर बढ़ने लगे।इसी बीच पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किया गया। उसके बाद गोली चली  कई कार्यकर्ताओं की मौत हो गई लाशें पड़ी थी चारों ओर चीख-पुकार सुनकर  मेरी तो सांस थम गई थी फिर भी भगवान राम का नाम लेकर मैं उस अभियान में  जुटा रहा।भगदड़ के दौरान मैं भी गिरकर घायल हो गया और मुझे इलाज के लिए मणिराम छावनी स्थित अस्पताल ले जाया गया। उधर उमा भारती बहुत चिंतित थी उन्होंने लोगों को मेरा पता लगाने के लिए भेजा। उन्हें इस बात का दुख था कि मैं उनके साथ आया था। वह कह रही थी कि अगर उसे कुछ हो गया तो मैं कलंकित हो जाऊंगी।

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 इसी तरह  एसडीएम अनिल कुमार दमेले भी चिंतित थे क्योंकि वह बांदा के रहने वाले थे और मेरे बड़े भैया के मित्र थे। वह भी यह सोच रहे थे कि अगर उसे कुछ हो गया तो तो मैं अपने आप को माफ नहीं कर पाऊंगा। इस बीच घायलों की सूची में मेरा नाम मिलने से उमा भारती और एसडीएम ने राहत की सांस ली।इस घटना के बाद मुझे शोहरत मिली और भगवान राम की कृपा से नया जीवन मिला। लेकिन पुलिस ने मेरे परिवार के साथ उत्पीड़न की जो कार्रवाई की उसे आज भी नहीं भूल पाया हूं।  इसी घटना के बाद विधानसभा के चुनाव में मुझे बांदा सदर सीट से चुनाव लड़ने का मौका मिला और जनता ने भी आशीर्वाद के रूप में मुझे विधानसभा पहुंचाने का काम किया। जिसके लिए मैं सदैव जनमानस का ऋणी रहूंगा।

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बताते चलें कि 30 अक्टूबर को अयोध्या में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के आदेश पर गोली चलवा दी गई थी उसी समय कार सेवा के लिए आ रहे कार्यकर्ताओं को जगह-जगह गिरफ्तार किया गया था।उसी दौरान उमा भारती बांदा में गिरफ्तार हुई थी जिन्हें पूर्व विधायक राजकुमार शिवहरे ने अपनी मारुति वैन में लेकर अस्थाई जेल से फरार होने में मदद की थी। इसके 2 नवंबर को को दोबारा कार सेवा हुई थी जिसमें विवादित ढांचा का गुंबद तोड़ दिया गया था।

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