बांदा कृषि विश्वविद्यालय में किसानों, व्यापारियों, एफपीओ और दाल मिल संचालकों के लिए आयोजित हुआ एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

कृषि उपज के वैज्ञानिक भंडारण, वेयरहाउसिंग सुविधाओं के बेहतर उपयोग तथा भांडागारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण...

Jun 4, 2026 - 17:20
Jun 4, 2026 - 17:21
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बांदा कृषि विश्वविद्यालय में किसानों, व्यापारियों, एफपीओ और दाल मिल संचालकों के लिए आयोजित हुआ एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

डब्ल्यूडीआरए जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक भंडारण और वित्तीय सुविधाओं की दी जानकारी

बांदा। कृषि उपज के वैज्ञानिक भंडारण, वेयरहाउसिंग सुविधाओं के बेहतर उपयोग तथा भांडागारण विकास एवं विनियामक प्राधिकरण (डब्ल्यूडीआरए) के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट निदेशालय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों, व्यापारियों, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के सदस्यों तथा दाल मिल संचालकों को आधुनिक भंडारण व्यवस्था और उससे जुड़ी वित्तीय सुविधाओं की जानकारी दी गई।

कृषि प्रसार विभाग के सेमिनार हॉल में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट निदेशक प्रो. भानु प्रकाश मिश्रा के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ उसकी सुरक्षित भंडारण व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि किसानों को वैज्ञानिक और सुरक्षित भंडारण सुविधा उपलब्ध हो जाए तो वे अपनी उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखकर उचित समय पर बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।

डब्ल्यूडीआरए पंजीकृत गोदाम किसानों के लिए लाभकारी

मुख्य अतिथि एवं स्नातकोत्तर अध्ययन के अधिष्ठाता प्रो. मुकुल कुमार ने कहा कि कटाई के बाद होने वाली कृषि उपज की क्षति को कम करना आज की बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक भंडारण तकनीकों और प्रमाणित गोदामों के उपयोग से कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और मात्रा दोनों सुरक्षित रखी जा सकती हैं, जिससे किसानों की आय में वृद्धि संभव है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित अनंत कुमार पांडेय, प्रतिनिधि, नेशनल ई-रिपॉजिटरी लिमिटेड (NERL), ने ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक वेयरहाउस स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों की मदद से वेयरहाउसिंग संरचना विकसित कर किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

वेयरहाउस रसीद के आधार पर मिलेगा ऋण

कार्यक्रम का समन्वयन कर रहे डॉ. अर्जुन प्रसाद वर्मा ने प्रतिभागियों को बताया कि डब्ल्यूडीआरए पंजीकृत गोदामों में रखी गई कृषि उपज के आधार पर किसान बिना उपज बेचे भी ऋण प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद (e-NWR) प्रणाली को कृषि विपणन के लिए एक महत्वपूर्ण सुधार बताते हुए इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

विशेष अतिथि रुद्र प्रताप मिश्र, बैंकिंग कृषि अधिकारी, पंजाब नेशनल बैंक, मवई शाखा बांदा ने वेयरहाउसिंग संरचना के वित्तपोषण और ई-एनडब्ल्यूआर के आधार पर उपलब्ध गिरवी ऋण (Pledge Loan) की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था किसानों को कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी से बचाती है और आर्थिक रूप से सशक्त बनाती है।

विशेषज्ञों ने दिए तकनीकी व्याख्यान

प्रशिक्षण कार्यक्रम में चार तकनीकी व्याख्यान आयोजित किए गए। डॉ. अमित कुमार यादव ने वैज्ञानिक भंडारण के लाभ और कटाई उपरांत हानि को कम करने के उपायों पर चर्चा की। डॉ. एम.के. मिश्रा ने किसान स्तर पर सुरक्षित भंडारण की व्यवहारिक तकनीकों की जानकारी दी। डॉ. बी.पी. मिश्रा ने सार्वजनिक वेयरहाउसिंग के लाभों पर प्रकाश डाला, जबकि डॉ. अर्जुन प्रसाद वर्मा ने नेगोशिएबल वेयरहाउस रसीद, प्लेज फाइनेंस तथा वेयरहाउसिंग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम-2007 की प्रमुख विशेषताओं पर विस्तृत जानकारी दी।

32 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

कार्यक्रम में कुल 32 किसानों, एफपीओ सदस्यों, व्यापारियों एवं दाल मिल संचालकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के समापन के बाद प्रतिभागियों को निकटवर्ती डब्ल्यूडीआरए पंजीकृत वेयरहाउस का भ्रमण भी कराया गया, जिससे उन्हें भंडारण प्रणाली की व्यवहारिक जानकारी प्राप्त हो सके।

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