तीन दिवसीय श्री हरिकथामृत का भव्य समापन, सेवा समर्पण बना प्रेरणा का स्रोत

कर्वी स्थित सत्संग भवन, प्रयागराज रोड में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय श्री हरिकथामृत का समापन...

Apr 1, 2026 - 16:20
Apr 1, 2026 - 16:21
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तीन दिवसीय श्री हरिकथामृत का भव्य समापन, सेवा समर्पण बना प्रेरणा का स्रोत

कथा और सेवा के संगम से कर्वी में बना आध्यात्मिक माहौल, हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता

चित्रकूट। कर्वी स्थित सत्संग भवन, प्रयागराज रोड में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय श्री हरिकथामृत का समापन 31 मार्च को सायं 4 बजे से 7:30 बजे तक भक्ति, ज्ञान और सेवा के अद्भुत संगम के साथ सम्पन्न हुआ। इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह का वातावरण निर्मित कर दिया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में भरत मिश्रा (पूर्व कुलपति, ग्रामोदय विश्वविद्यालय), योगेश कुमार दुबे (विकलांग विश्वविद्यालय, चित्रकूट), भैरों प्रसाद मिश्रा (पूर्व सांसद), चन्द्र प्रकाश खरे (पूर्व जिला अध्यक्ष, भाजपा), आनंद त्रिपाठी एवं हरिओम करवरिया (भाजपा नेता), संतोष तिवारी, संजय मिश्रा, देवमुनी तिवारी, जेपी यादव सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर शुभारंभ किया।

29 से 31 मार्च तक चले इस दिव्य आयोजन में क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर कथा श्रवण किया और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। प्रतिदिन लगभग 300 से 500 श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे क्षेत्र को भक्ति और श्रद्धा से ओत-प्रोत कर दिया। श्री आशुतोष महाराज जी की प्रेरणा से आयोजित इस कथा में जीवन मूल्यों, संस्कारों और समाज सेवा का सशक्त संदेश दिया गया।

समापन सत्र में आलोक चुबे (कुलपति, महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय) एवं दिनेश मिश्रा (पूर्व विधायक) सहित अनेक अतिथियों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर संस्थान की साध्वी कथावाचकों ने अपने संदेश में कहा कि “कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का मार्ग है। जब तक भक्ति के साथ सेवा नहीं जुड़ती, तब तक साधना पूर्ण नहीं होती।”

कार्यक्रम की विशेषता स्थानीय टीम द्वारा किया गया उत्कृष्ट सेवा कार्य रहा। श्रद्धालुओं के लिए बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, भोजन एवं अन्य सुविधाओं का सुचारु संचालन पूरे आयोजन के दौरान निरंतर किया गया, जो सभी के लिए प्रेरणादायक रहा।

अंत में आयोजकों ने सभी सहयोगियों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों के आयोजन का संकल्प लिया।

“जहाँ कथा, वहाँ सेवा — यही सच्ची साधना है।”

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