चित्रकूट की धरती को हराभरा बनाने निकले जल जंगल जुगनू

यदि इन दिनों चित्रकूटधाम की सड़कों, पहाड़ियों, जंगलों और ग्रामीण मार्गों पर सफेद वस्त्र पहने कोई व्यक्ति हाथों में नीम, जामुन, आम, महुआ या अन्य देशी प्रजातियों...

Jul 8, 2026 - 14:00
Jul 8, 2026 - 14:01
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चित्रकूट की धरती को हराभरा बनाने निकले जल जंगल जुगनू

कहा कि आज का बीज, कल का जंगल 

बिखेर रहे वृक्षों के बीज

चित्रकूट। यदि इन दिनों चित्रकूटधाम की सड़कों, पहाड़ियों, जंगलों और ग्रामीण मार्गों पर सफेद वस्त्र पहने कोई व्यक्ति हाथों में नीम, जामुन, आम, महुआ या अन्य देशी प्रजातियों के बीज लिए प्रकृति की गोद में बिखेरता दिखाई दे तो समझ जाइए कि यह कोई साधारण कार्य नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली का एक मौन अभियान है। सोशल मीडिया पर पर्यावरण संरक्षण, नदी स्वच्छता, जैव विविधता संवर्धन और आदिवासी व वंचित बच्चों की शिक्षा के लिए अपने अनूठे कार्यों के कारण व्यापक पहचान बना चुके हैं। प्रकृति के प्रति समर्पित यह प्रयास अब चित्रकूट की धरती को फिर से हराभरा बनाने की दिशा में एक जनआंदोलन का स्वरूप लेता जा रहा है।

जल जंगल जुगनू का मानना है कि आज जो बीज धरती पर बिखेरे जा रहे हैं वही आने वाले वर्षों में विशाल वृक्ष बनकर पर्यावरण संरक्षण, जलवायु संतुलन और वन्यजीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। नीम, जामुन, आम और महुआ जैसे वृक्ष केवल हरियाली ही नहीं बढ़ाते, बल्कि पक्षियों, वन्य जीवों और ग्रामीण समुदायों के जीवन से भी गहराई से जुड़े हुए हैं। चित्रकूट का क्षेत्र धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भगवान राम की तपोभूमि रही इस पावन भूमि के जंगल, पहाड़ और नदियाँ सदियों से प्रकृति और मानव के बीच संतुलन का संदेश देते रहे हैं, लेकिन बढ़ते शहरीकरण, अंधाधुंध कटान और बदलती जीवनशैली के कारण हरियाली पर निरंतर दबाव बढ़ा है। ऐसे समय में बीज बिखेरने का यह अभियान प्रकृति को पुनर्जीवित करने की एक सार्थक पहल बनकर उभरा है।

जल जंगल जुगनू वर्षों से चित्रकूट और आसपास के क्षेत्रों में नदियों की स्वच्छता, जंगलों के संरक्षण और आदिवासी तथा वंचित बच्चों की शिक्षा के लिए निरंतर कार्य करते रहे हैं। कई अवसरों पर उन्होंने सामाजिक जागरूकता अभियानों, स्वच्छता कार्यक्रमों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और पर्यावरण का संदेश पहुंचाने का उनका प्रयास लोगों के बीच प्रेरणा का विषय बना हुआ है। इस अभियान के अंतर्गत सड़कों के किनारे, पहाड़ी क्षेत्रों, जंगलों की खाली भूमि, नदी किनारों तथा प्राकृतिक रूप से उपयुक्त स्थानों पर बीज बिखेरे जा रहे हैं। ताकि वर्षा ऋतु में उनमें से अधिकाधिक पौधे विकसित हो सकें। यह पहल बिना किसी बड़े संसाधन, सरकारी सहायता या आर्थिक लाभ के केवल प्रकृति प्रेम और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से की जा रही है। 

जल जंगल जुगनू ने समाज के सभी वर्गों, युवाओं, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों और प्रकृति प्रेमियों से अपील की है कि वे भी अपने आसपास उपलब्ध देशी वृक्षों के बीज एकत्र करें और उन्हें उपयुक्त स्थानों पर बिखेरकर इस हरित अभियान का हिस्सा बनें। उनका कहना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिवर्ष कुछ बीज भी प्रकृति को समर्पित करे तो आने वाले वर्षों में लाखों नए वृक्ष धरती को हराभरा बना सकते हैं। उनका कहा है कि एक बीज केवल एक पौधा नहीं, बल्कि भविष्य की छाया, स्वच्छ हवा, पक्षियों का आश्रय और आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का उपहार है। आज का बीज, कल का जंगल होगा।

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