बुंदेलखंड के वैभव को वैश्विक पटल पर स्थापित करेगा 'बुंदेलखंड विश्वकोश' : प्रो. यशवंत ठाकुर
'बुंदेलखंड विश्वकोश' के निर्माण से यह संकल्प अवश्य फलीभूत होगा और बुंदेलखंड की महिमा का वैश्विक प्राकट्य होगा...
बुंदेलखंड विश्वकोश समिति द्वारा परिसंवाद एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन
कई विशिष्ट विभूतियों को किया गया सम्मानित, 'बुंदेलखंड एक दृष्टि' पत्रिका का हुआ लोकार्पण
सागर। बुंदेलखंड के समृद्ध इतिहास, कला, संस्कृति और पर्यटन को एक मंच पर सहेजने के उद्देश्य से 'बुंदेलखंड विश्वकोश समिति' द्वारा परिसंवाद एवं सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यशवंत ठाकुर उपस्थित रहे।
अपने सारगर्भित उद्बोधन में प्रो. यशवंत ठाकुर ने कहा कि बुंदेलखंड के वैभव, कला-संस्कृति और पर्यटन स्थलों की जिस स्तर पर ब्रांडिंग होनी चाहिए थी, उसमें हम कहीं न कहीं पीछे रह गए। इसी कारण हमारा बुंदेलखंड विश्व मानचित्र पर अपना वह उचित स्थान नहीं बना सका, जिसका वह हकदार है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि 'बुंदेलखंड विश्वकोश' के निर्माण से यह संकल्प अवश्य फलीभूत होगा और बुंदेलखंड की महिमा का वैश्विक प्राकट्य होगा। उन्होंने कहा कि हम सभी की यह साझी जिम्मेदारी है कि हम अपनी जन्मभूमि की गौरवगाथा से दुनिया को परिचित कराएं, यही हमारे बुंदेलखंडी होने की सार्थकता है। प्रो. ठाकुर ने पर्यटन के परिप्रेक्ष्य में भीमकुंड का विशेष उल्लेख किया और कहा कि हमें संसार को यह बताना होगा कि महान दार्शनिक ओशो रजनीश को बुद्धत्व की प्राप्ति भी इसी पवित्र धरती पर हुई थी।
कार्यक्रम का कुशल संचालन संस्था की अध्यक्ष प्रो. सरोज गुप्ता ने किया। उन्होंने बताया कि इस परिसंवाद का मुख्य उद्देश्य विश्वकोश की अब तक की प्रगति का प्रतिवेदन प्रस्तुत करना और भविष्य की ठोस कार्ययोजना तैयार करना है। दतिया से आए सुरमणि विनोद मिश्र ने बुंदेली लोक जीवन पर केंद्रित अपनी प्रभावी रचना के माध्यम से बताया कि कैसे आहिस्ता-आहिस्ता हमारी संस्कृति और परंपराओं का क्षरण हो रहा है। दमोह की साहित्यकार डॉ. प्रेमलता नीलम ने अपनी ओजस्वी रचनाओं से बुंदेलखंड के महापुरुषों का गुणगान किया। वहीं, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. लक्ष्मीनारायण चौरसिया ने कहा कि बुंदेलखंड की समस्त जानकारियों को एक स्थान पर सहेजने का यह भगीरथ प्रयास अत्यंत अभिनंदनीय है।
परिसंवाद के दौरान विभिन्न समितियों ने अपना प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। आयुर्वेदाचार्य राजेश शुक्ला ने खेल और आयुर्वेद समिति की रिपोर्ट साझा की। डॉ. श्वेता यादव ने बताया कि बुंदेलखंड के प्राणी जगत की विस्तृत जानकारी एकत्र कर ली गई है, जिसमें यहाँ की मिट्टी और जलवायु के अनुकूल पाए जाने वाले जीवों की सूची तैयार कर विश्वकोश में शामिल की जाएगी। डॉ. नीलिमा पिंपलापुरे ने बुंदेलखंड को 'देश की धड़कन' के रूप में स्थापित करने के अपने अनवरत प्रयासों को साझा किया। डॉ. ज्योति चौहान ने विश्वकोश को अधिक प्रामाणिक बनाने हेतु कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इसके अलावा विश्वकोश समिति के प्रभारी प्रो. बृजेश श्रीवास्तव, प्रो. नागेश दुबे, डॉ. आशीष द्विवेदी और डॉ. कृष्णा राव ने भी अपनी-अपनी समितियों की प्रगति से अवगत कराया।
पत्रिका का लोकार्पण
कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री शशि दीक्षित एवं डॉ. ऋतु व्यास द्वारा प्रस्तुत सुमधुर सरस्वती वंदना से हुआ। इस गरिमामय अवसर पर मंचासीन अतिथियों ने संस्था के सचिव सचिन चतुर्वेदी द्वारा संपादित पत्रिका 'बुंदेलखंड एक दृष्टि' का विमोचन भी किया।
इन प्रतिभाओं का हुआ भव्य सम्मान
बुंदेलखंड विश्वकोश परियोजना में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाली और अपने कार्यक्षेत्रों में प्रतिभा व समर्पण से नवीन अध्याय लिखने वाली विभिन्न शख्सियतों को मंच से शॉल, श्रीफल, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया:
- डॉ. मनीष जैन (सह प्राध्यापक, बीएमसी) - चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु 'बुंदेली गौरव' सम्मान।
- श्रीमती प्रमिला सागर - कला जगत में विशेष योगदान हेतु 'बुंदेली श्री' सम्मान।
- सुश्री शशि दीक्षित - साहित्य के क्षेत्र में 'बुंदेली विभूति' सम्मान।
- डॉ. प्रेमलता नीलम (दमोह) - शिक्षा व साहित्य जगत में 'बुंदेली श्री' सम्मान।
- श्रीमती मंजू विजय त्रिपाठी - 'बुंदेल श्री' सम्मान।
इस अवसर पर डॉ. गजाधर सागर, डॉ. देवेन्द्र गुरु, डॉ. कृष्णकांत बख्शी, डॉ. रेखा बख्शी, डॉ. हरिमोहन गुप्ता, डॉ. विजयलक्ष्मी दुबे, डॉ. पवन शर्मा, मनीष यादव, सुनील केशरवानी, दामोदर प्रजापति, शोभा सराफ, रंजना चौरसिया, अरविंद दीक्षित, सावित्री मौर्य, पंकज सोनी, डॉ. कीर्ति पटेल, डॉ. आशीष पटेल, जागेंद्र सिंह, और जीतू चौरसिया सहित बड़ी संख्या में शोध छात्र, प्रबुद्धजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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