बाँदा : दबंगों की भेंट चढ़ी 73 वर्षीय रामप्यारी, परिवार की एकमात्र 'पालनहार' की पीट-पीटकर निर्मम हत्या
शहर के कोतवाली नगर अंतर्गत दुर्गा बाजार मोहल्ले में गली और नाली निर्माण का एक मामूली विवाद दबंगई और खूनी संघर्ष की ऐसी भेंट चढ़ा...
शहर के कोतवाली नगर अंतर्गत दुर्गा बाजार मोहल्ले में गली और नाली निर्माण का एक मामूली विवाद दबंगई और खूनी संघर्ष की ऐसी भेंट चढ़ा, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ कर रख दिया। जिस नाली के निर्माण से उस घर के मालिकों को कोई आपत्ति नहीं थी, वहां बेवजह अपनी धौंस जमाने आए पड़ोसियों ने 73 वर्षीय वृद्ध महिला रामप्यारी की पीट-पीटकर हत्या कर दी। आठ दिनों तक मौत से संघर्ष करने के बाद कानपुर के हैलट अस्पताल में वृद्धा ने दम तोड़ दिया। वृद्धा की मौत केवल एक जान का जाना नहीं है, बल्कि एक विधवा बहू और अनाथ पोते-पोतियों के सिर से उनके जीवन यापन का एकमात्र सहारा छिन जाना है।
मुख्य बिंदु:
- बेवजह की दबंगई: विवादित नाली आरोपियों के घर के सामने नहीं थी, फिर भी निर्माण रुकवाने को लेकर किया गया जानलेवा हमला।
- छिन गई आजीविका: मृतका रामप्यारी पेंशनर थीं। उन्हीं की पेंशन से विधवा बहू और पोते-पोतियों का पेट पलता था।
- मेडिकल साक्ष्य: सीटी स्कैन में वृद्धा की आंत फटने और पेट में खून भरने की हुई थी पुष्टि, सिर पर भी किए गए थे डंडों से गंभीर वार।
- आरोपियों का पैंतरा: खुद को बचाने के लिए साहू परिवार सोशल मीडिया पर खेल रहा है 'विक्टिम कार्ड', क्रॉस एफआईआर से मामले को उलझाने की कोशिश।
विवाद का बेतुका कारण: बेवजह दिखाई गई दबंगई
घटनास्थल से प्राप्त वीडियो और तस्वीरों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि गली बेहद संकरी है और वहां पत्थर व स्लैब टूटे हुए हैं। स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार के अनुसार, 2 अगस्त की सुबह ठेकेदार द्वारा नाली बनाई जा रही थी। यह नाली साहू परिवार के आकाश साहू, अशोक साहू, राकेश साहू के घर के सामने नहीं पड़ रही थी। जिसके घर के सामने निर्माण हो रहा था, उन्हें कोई परेशानी नहीं थी।
बावजूद इसके, साहू परिवार ने वहां आकर निर्माण का बेजा विरोध किया। जब रामप्यारी और उनके परिवार ने इस दबंगई का विरोध किया, तो बात गाली-गलौज से शुरू होकर लाठी-डंडों तक पहुंच गई। आरोपियों ने 73 वर्षीय बुजुर्ग महिला को धक्का देकर गिराया और उनके सिर व पेट पर डंडों और लात-घूंसों से इतने निर्मम प्रहार किए कि उनकी आंतें फट गईं।
अब क्या होगा उस अनाथ परिवार का?
इस घटना का सबसे दुखद और मानवीय पहलू यह है कि मृतका रामप्यारी ही अपने घर का 'सूरज' थीं। उनके बेटे का निधन पहले ही हो चुका है। घर में सिर्फ एक विधवा बहू रजनी और छोटे पोते-पोतियां हैं। रामप्यारी को मिलने वाली पेंशन ही इस परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन थी। उनकी मौत के साथ ही इस परिवार का वर्तमान और भविष्य दोनों अंधकार में डूब गया है। अंतिम संस्कार के दृश्यों और बिलखती बहू की तस्वीरें किसी का भी कलेजा चीरने के लिए काफी हैं। बड़ा सवाल यह है कि दबंगों के इस कहर के बाद अब इस परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी कौन लेगा?
सोशल मीडिया पर आरोपियों की पैंतरेबाज़ी
एक ओर जहां वृद्धा की चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई है, वहीं दूसरी ओर आरोपी पक्ष सोशल मीडिया पर अपने बचाव की जमीन तैयार कर रहा है। मुख्य आरोपी आकाश साहू और उनके करीबियों द्वारा फेसबुक पर सीसीटीवी फुटेज और सिर से खून बहने की तस्वीरें साझा की जा रही हैं। उन्होंने यूपी पुलिस और एसपी बांदा को टैग करते हुए "पूरे परिवार को जान से मारने की कोशिश" का दावा किया है।
पुलिस ने घटना वाले दिन के चार दिन बाद 6 अगस्त को ही दूसरे पक्ष की तहरीर पर भी क्रॉस एफआईआर दर्ज की थी। यह सच है कि विवाद में दूसरे पक्ष को भी चोटें आई हैं, लेकिन क्या आपसी मारपीट में किसी को लगी चोट, एक 73 वर्षीय बेसहारा वृद्धा के पेट में लातें मारकर उसकी आंतें फाड़ देने और उसकी जान ले लेने को सही ठहरा सकती है?
पुलिस प्रशासन से न्याय की गुहार
दुर्गा बाजार का यह हत्याकांड समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक परीक्षा है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि 'क्रॉस केस' की आड़ में असल गुनेहगार कानून की खामियों का फायदा उठाकर न बच निकलें।
चूंकि दोनों एफआईआर 6 अगस्त को वृद्धा की मृत्यु से पहले दर्ज की गई थीं, इसलिए पुलिस ने तब भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 351(3), और 352 (मारपीट, चोट पहुंचाना और धमकी देना) के तहत मामला दर्ज किया था। अब चुंकि पीड़ित महिला की मेडिकल साक्ष्यों (आंत फटने और सिर की चोट) के साथ मृत्यु हो चुकी है, कानूनी जानकारों के अनुसार पुलिस को इस मामले में 'गैर इरादतन हत्या' या 'हत्या' की धाराएं बढ़ानी पड़ेंगी।
फिलहाल, घटना स्थल (टूटी हुई गली और नाली) के वीडियो और मेडिकल/पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स पुलिस जांच का मुख्य आधार बनेंगे। स्थानीय लोगों की निगाहें अब बांदा पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। बांदा पुलिस और एसपी को मामले की निष्पक्ष जांच कर हत्या की धाराओं में कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी अपनी बाहुबल के नशे में किसी गरीब और बेसहारा परिवार का निवाला न छीन सके। पीड़ित परिवार आज सिर्फ इंसाफ की ओर देख रहा है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
