एमपी का 'मुनाफा' और यूपी की सड़कों की 'कब्र' : छतरपुर की रामपुर खदान के ओवरलोड डंपरों के आगे किसने टेके घुटने
मध्यप्रदेश की मौरंग उत्तर प्रदेश की सड़कों और पुलों के लिए काल बन चुकी है। छतरपुर (एमपी) की खदानों से निकलने वाले मौरंग के ओवरलोड डंपरों...
रिपोर्ट : सचिन चतुर्वेदी, बुन्देलखण्ड न्यूज़...
बांदा। मध्यप्रदेश की मौरंग उत्तर प्रदेश की सड़कों और पुलों के लिए काल बन चुकी है। छतरपुर (एमपी) की खदानों से निकलने वाले मौरंग के ओवरलोड डंपरों ने बांदा जिले के बुनियादी ढांचे की कमर तोड़ कर रख दी है। हालात इतने बदतर हैं कि करोड़ों की लागत से बने नए पुल और सड़कें कुछ ही महीनों में मलबे में तब्दील होने लगते हैं, और सिस्टम मूकदर्शक बनकर इस बर्बादी का तमाशा देखता रह जाता है।
सबसे बड़ा खेल मध्यप्रदेश के छतरपुर जनपद स्थित 'रामपुर मौरंग खदान' में चल रहा है। बांदा के गिरवां क्षेत्र से नजदीक इस खदान में सिर्फ ओवरलोडिंग ही नहीं, बल्कि खनन के तौर-तरीके भी पूरी तरह गैरकानूनी हैं। हमारे कैमरों में कैद हुई तस्वीरें बता रही हैं, खदान संचालक एनजीटी के सारे नियमों को ताक पर रखकर नदी की बीच जलधारा में 'लिफ्टर' लगाकर मौरंग का दोहन कर रहे हैं। एमपी में मौरंग सस्ती होने और खदान से ही बेखौफ ओवरलोडिंग की छूट मिलने के कारण परिवहन माफियाओं ने रामपुर खदान को अपना सबसे सुरक्षित अड्डा बना लिया है।
सड़कों की इस दुर्दशा पर जब जिम्मेदार विभागों से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशाषी अभियंता मनोज पाण्डेय का स्पष्ट कहना है कि, "सड़कें और पुल अपने तय मानकों के अनुरूप बनाए गए हैं, लेकिन जब इन पर क्षमता से तीन-चार गुना अधिक भार वाले डंपर दौड़ेंगे, तो ये टिक ही नहीं सकते।" अधिशाषी अभियंता का यह बयान केवल पीडब्ल्यूडी की सफाई नहीं है, बल्कि यह बांदा के परिवहन विभाग, खनन विभाग और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवालिया निशान है। आखिर सीमा पार से कई गुना ओवरलोड डंपर यूपी की सीमा में बेरोकटोक कैसे घुस रहे हैं?
इस बेतहाशा ओवरलोडिंग की सबसे भारी कीमत गिरवां, शेरपुर और स्योढ़ां क्षेत्र की जनता चुका रही है। हाल ही में जिन पुलों और एप्रोच मार्गों की मरम्मत कराई गई थी, उनकी सतह फटने लगी है। सड़कें उखड़ चुकी हैं और पुलों के एप्रोच मार्ग धंस रहे हैं। ग्रामीण डरे हुए हैं कि पुलों पर पड़ रहा यह भारी दबाव किसी दिन बड़े और जानलेवा हादसे का सबब बन सकता है।
जब पीडब्ल्यूडी खुद मान रहा है कि सड़कें कई गुना भार से टूट रही हैं, और नदी में लिफ्टर लगाकर अवैध खनन जगजाहिर है, तो बांदा प्रशासन आखिर किस बात का इंतजार कर रहा है? क्या प्रशासन तभी जागेगा जब ओवरलोड डंपरों के दबाव से कोई पुल ढह जाएगा और दर्जनों निर्दोष जिंदगियां मलबे में दब जाएंगी? समय आ गया है कि बांदा के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक इस ओवरलोड सिंडिकेट पर सीधा प्रहार करें, अन्यथा यूपी के राजस्व और बुनियादी ढांचे को एमपी के माफिया यूं ही रौंदते रहेंगे।
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