मुरवल सहकारी समिति में खाद घोटाले का खुलासा, किसानों से ठगी के आरोप; एफआईआर और समिति सीज करने की उठी मांग
जांच में समिति के स्टॉक और अभिलेखों का मिलान करने पर 174 बोरी डीएपी खाद का अंतर पाया गया...
औचक निरीक्षण में स्टॉक, वितरण और रजिस्टर में मिली गंभीर अनियमितताएं, जिला कृषि अधिकारी ने लिए नमूने
बांदा। बी-पैक्स सहकारी समिति मुरवल में किसानों को सरकारी सस्ती खाद उपलब्ध कराने के नाम पर कथित अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। शिकायत मिलने पर शुक्रवार को जिला कृषि अधिकारी संजय कुमार ने समिति का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान स्टॉक, वितरण व्यवस्था और अभिलेखों में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आने पर विभाग में हड़कंप मच गया। जिला कृषि अधिकारी ने मौके से खाद के नमूने भी लिए और दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई के संकेत दिए।
किसानों को 4 बोरी की एंट्री, 2 बोरी का वितरण
निरीक्षण के दौरान बिक्री रजिस्टर और किसानों से दूरभाष पर की गई पुष्टि में सामने आया कि मशीन में किसानों के नाम पर चार बोरी डीएपी खाद दर्ज की जा रही थी, जबकि वास्तविक रूप से उन्हें केवल दो बोरी ही दी जा रही थी। इस खुलासे के बाद वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
174 बोरी डीएपी स्टॉक से गायब
जांच में समिति के स्टॉक और अभिलेखों का मिलान करने पर 174 बोरी डीएपी खाद का अंतर पाया गया। आरोप है कि रजिस्टर में हेरफेर की गई तथा कुछ मामलों में विद्यालय जाकर बच्चों के अंगूठे लगवाकर मशीन में खाद वितरण दर्शाने जैसी अनियमितताएं भी सामने आईं। साथ ही खाली बोरों में खाद छिपाकर रखने की बात भी जांच में उजागर हुई।
500 बोरी यूरिया और पोटाश वितरण पर भी सवाल
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि 500 बोरी यूरिया का ई-वे बिल मुरवल समिति के नाम से बना था, लेकिन खाद को बिना सूचना उपकेंद्र भेज दिया गया। मौके पर एक भी बोरी उपलब्ध नहीं मिली। वहीं लगभग 600 बोरी पोटाश भी कर्मचारियों द्वारा मंगाई गई थी। आरोप है कि 550 रुपये मूल्य वाली इफ्को पोटाश को अधिक कीमत पर बेचने की तैयारी थी, जिससे किसानों से प्रति बोरी करीब 200 रुपये अतिरिक्त वसूले जाने की आशंका जताई गई।
जिला कृषि अधिकारी ने लिए नमूने
जिला कृषि अधिकारी संजय कुमार ने डीएपी तथा किसानों को टैग किए जा रहे डीपी सल्फर 90 प्रतिशत के नमूने जांच के लिए लिए। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ खाद वितरण में किसी भी प्रकार की धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्टॉक, रजिस्टर और वितरण में मिली अनियमितताओं के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
भाकियू ने की एफआईआर और समिति सीज करने की मांग
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के जिलाध्यक्ष महेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि सहकारी समिति किसानों की सुविधा के लिए बनाई गई है, न कि उनकी लूट के लिए। उन्होंने दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर समिति को सीज करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो किसान संगठन आंदोलन करेगा।
फिलहाल इस पूरे मामले के सामने आने के बाद मुरवल सहकारी समिति में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है और किसान प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
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