सदगुरु नेत्र चिकित्सालय में मनाया गया विश्व नेत्रदान दिवस
श्री सदगुरु नेत्र चिकित्सालय में विश्व नेत्रदान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर लोगो को नेत्रदान का महत्व बताते हुए जागरूक किया...
2007 में पद्मश्री स्व. जैन ने आई बैंक खोल रोपित किया नेत्रदान का बीज
दुनिया से अलविदा लेते हुए कर गए आंखों का दान
चित्रकूट। श्री सदगुरु नेत्र चिकित्सालय में विश्व नेत्रदान दिवस मनाया गया। इस अवसर पर लोगो को नेत्रदान का महत्व बताते हुए जागरूक किया। बताया गया कि कोई भी व्यक्ति किसी भी जाति धर्म का हो नेत्रदान कर सकते है। साथ ही नेत्रदान करने के लिए कोई उम्र का बन्धन नहीं है।
नेत्रदान लगभग हर व्यक्ति कर सकता है। नेत्रदान मरणोपरांत ही किया जाता है। व्यक्ति के मृत्यु के छह घंटे के अंदर नेत्रदान किया जा सकता है। चाहे व्यक्ति को चश्मा लग रहा हो या मधुमेह से पीड़ित हो अथवा मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा चुका हो वो भी नेत्रदान कर सकते है। नेत्रदान की प्रक्रिया में मात्र 15 से 20 मिनट का समय लगता है। नेत्रदान में आँख का ऊपरी भाग अर्थात पुतली (कार्निया) ही लिया जाता है। जिससे नेत्रदाता के चेहरे में कोई भी विकृति नहीं आती है। व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात आँख की पुतली निकाल कर कार्निया जनित अंधत्व से व्यक्तियों की आँखों में प्रत्यारोपित किया जाता है। जिससे वह फिर से दुनिया देख सकते है। पद्मश्री स्व. डॉ बीके जैन ने चित्रकूट में 2007 में नेत्रदान का बीज रोपित किया था। पहला नेत्रदान अपने ही परिवार से कराया और दुनिया को अलविदा कहते हुए अपनी भी आंखों का दान कर गए। यह जानकारी देते हुए सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक एवं ट्रस्टी डॉ इलेश जैन ने बताया कि अभी तक लगभग 10 हजार लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया है एवं लगभग 9 हजार लोगों का सफल पुतली प्रत्यारोपण हो चुका है। इस मौके पर कार्निया विभाग के प्रमुख नेत्र चिकित्सक डॉ गौतम सिंह परमार ने संकल्प लिया कि दिखलाएंगे उनको भी जिनके जीवन में अंधेरा है। जिनकी आशाओं के आंगन को अंधकार ने घेरा है। इस मौके पर दिवंगत नेत्रदाताओं को श्रद्धांजलि देते हुए उनके परिवारजनों के प्रति आभार प्रकट किया। इस दौरान सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के नेत्र चिकित्सक और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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