श्री रामकथा में बाललीला की कथा सुन श्रोता हुए मंत्रमुग्ध
श्री रघुवीर मंदिर ट्रस्ट बड़ी गुफा के तत्वावधान में विद्याधाम विद्यालय प्रांगण में चल रही नौ दिवसीय श्री रामकथा में वृंदावन से आए मलूक पीठाधीश्वर...
चित्रकूट। श्री रघुवीर मंदिर ट्रस्ट बड़ी गुफा के तत्वावधान में विद्याधाम विद्यालय प्रांगण में चल रही नौ दिवसीय श्री रामकथा में वृंदावन से आए मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महराज ने सातवें दिन भगवान भोलेनाथ और कागभुसुंडि के द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के बाल स्वरूप के दर्शन करने की कथा का रसपान कराया। बताया कि प्रभु श्री हरि नारायण जब अयोध्या नरेश राजा दशरथ के यहां रामरूप में जन्म लेते है तो भगवान शिव के हृदय में प्रभु राम के बाल स्वरूप के दर्शन की ओ इच्छा जागृत होती है। भगवान भोलेनाथ राम के स्वरूप, लीला और महिमा को भली-भांति जानते थे फिर भी उनके मन में एक दिन प्रभु के बाल रूप के दर्शन करने की तीव्र इच्छा जाग उठी। यह इच्छा इतनी प्रबल थी कि वे स्वयं को रोक न सके और जब भगवान अयोध्या में राम बाल रूप में अवतरित होकर अपनी बाल लीलाएँ कर रहे थे, तब उनकी मनमोहक छवि को देखने के लिए देवताओं और ऋषियों का मन भी व्याकुल हो उठता था। भगवान भोलेनाथ ने सोचा कि वे सीधे अपने दिव्य स्वरूप में जाएंगे तो लोग उन्हें पहचान लेंगे और बाल राम की सहज लीला में व्यवधान हो सकता है। इसलिए उन्होंने अपना भेष बदलकर जाने का निश्चय किया। भगवान महादेव ने एक साधारण तपस्वी का रूप धारण किया और अपने साथ कागभुशुंडी को भी लिया। दोनों साधु के वेश में अयोध्या पहुँचे। वहाँ का वातावरण अत्यंत पवित्र और आनंदमय था। जब वे महल के निकट पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि बालक राम अपने साथियों के साथ खेल रहे हैं। उनका बाल स्वरूप इतना मनमोहक था कि स्वयं महादेव भी कुछ क्षणों के लिए भावविभोर हो गए। बालक राम की चंचल आँखें, मधुर मुस्कान और उनकी निष्कपट लीला देखकर भगवान शिव का हृदय प्रेम से भर गया। वे उन्हें निहारते ही रह गए। कथा सुन श्रोता मंत्रमुग्ध रहे। इस मौके पर चित्रकूट के सभी ट्रस्टीगण, संत महंत, आमजन सदगुरू परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।
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