तो क्या पुलिस मुठभेड़ में मारा गया प्रभात नाबालिग था?

हिमांशी ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना गलती के मेरे भाई को मारा गया और मेरे पिता को भी झूठा फंसाया गया है। परिवार में किसी का भी कोई आपराधिक ​रिकार्ड नहीं है।

तो क्या पुलिस मुठभेड़ में मारा गया प्रभात नाबालिग था?

कानपुर

बिकरू गांव में सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों की हत्या की जांच बराबर जारी है। इस जांच में एक के बाद एक खुलासा हो रहा है। मुठभेड़ में मारे गए मुख्य आरोपित विकास दुबे के करीबी कार्तिकेय उर्फ प्रभात की बहन हिमांशी ने भाई को नाबालिग बताया है। उसने प्रभात की मार्कशीट भी दिखायी है। 

हिमांशी ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि बिना गलती के मेरे भाई को मारा गया और मेरे पिता को भी झूठा फंसाया गया है। परिवार में किसी का भी कोई आपराधिक ​रिकार्ड नहीं है। पुलिस की तीन बार तलाशी लेने के बाद भी घर से कोई साक्ष्य नहीं मिला था। हिमांशी ने अपने भाई की मार्कशीट भी दिखायी हैं उसमें उसकी जन्मतिथि 27 मई 2004 दर्ज है। 

फरीदाबाद पुलिस ने किया था गिरफ्तार

यूपी पुलिस का कहना है कि कर्तिकेय उर्फ प्रभात बिकरू गांव में पुलिस टीम पर गोलियां बरसाने में शामिल था। प्रभात  को फरीदाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसे कोर्ट पेश करने के बाद यूपी एसटीएफ को ट्रांजिट रिमांड पर दिया था।  यूपी एसटीएफ उसे रिमांड पर कानपुर ला रही थी तभी पनकी थाना क्षेत्र में गाड़ी खराब हो गयी। इस बीच प्रभात ने एसटीएफ के एक दरोगा की पिस्टल छिनकर भागने लगा, जब पुलिस ने उसे रोका तो फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में प्रभात मिश्रा मारा गया था। 

(हिन्दुस्थान समाचार)