'राज्य दो, वोट लो': बुंदेलखंड राज्य निर्माण के लिए गांव-गांव चलेगा अभियान, बांदा में लामबंद हुए कई संगठन
"सत्ताएं वोट से डरती हैं, इसलिए बुंदेलखंड के निवासियों को आगामी चुनाव से पहले 'राज्य दो, वोट लो' का अभियान गांव-गांव और गली-गली तक पहुंचाना होगा...
बांदा। "सत्ताएं वोट से डरती हैं, इसलिए बुंदेलखंड के निवासियों को आगामी चुनाव से पहले 'राज्य दो, वोट लो' का अभियान गांव-गांव और गली-गली तक पहुंचाना होगा।" यह हुंकार चार बार के पूर्व सांसद एवं 'बुंदेलखंड राज्य बनाओ मोर्चा' के संयोजक गंगा चरण राजपूत ने भरी। मंगलवार को स्थानीय जिला बार संघ कार्यालय में पत्रकारों और विभिन्न संगठनों को संबोधित करते हुए उन्होंने बुंदेलखंड की बदहाली, पलायन और पर्यावरणीय संकट का जमीनी खाका खींचते हुए अलग राज्य की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया।
पूर्व सांसद ने स्पष्ट किया कि यह किसी के खिलाफ बगावत नहीं है, बल्कि अपने अधिकारों और नेताओं को उनके वादे याद दिलाने का एक लोकतांत्रिक संघर्ष है।
राम मंदिर और अनुच्छेद 370 का दिया हवाला
श्री राजपूत ने कहा कि जब बीते 75 सालों में देश के भीतर 14 से 28 राज्य बन सकते हैं, तो एक बुंदेलखंड राज्य बनने में क्या परेशानी है? उन्होंने याद दिलाया कि देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का निर्माण करवाया और कश्मीर से धारा 370 हटाई। ये दोनों काम बेहद मुश्किल थे। उन्होंने वर्ष 2014 में झांसी की जनसभा में बुंदेलखंड राज्य बनाने का वादा किया था। अब समय आ गया है कि बुंदेलखंडवासी उनसे अपना यह तीसरा वादा पूरा करने की मांग करें।
जमीनी हकीकत: पर्यावरण, पानी और पलायन का संकट
बुंदेलखंड की मौजूदा भौगोलिक और आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए श्री राजपूत ने कई कड़वे सच सामने रखे:
- पर्यावरण का विनाश:_ 1947 में बुंदेलखंड में 30% जंगल थे, जो अब कटकर मात्र 3% रह गए हैं। अंधाधुंध खनन और पेड़ों की कटाई के कारण बांदा आज विश्व के सबसे गर्म शहरों में शुमार हो गया है। केन और बेतवा जैसी जीवनदायिनी नदियों की जलधाराएं खनन के चलते गड्ढों में तब्दील हो गई हैं।
- पलायन का दर्द:_ रोजगार और उचित जीवन स्तर के अभाव में बुंदेलखंड की लगभग 40% आबादी पलायन कर चुकी है। महानगरों में ईंट-भट्ठों, सिक्योरिटी गार्ड और मजदूरी के कामों में सबसे बड़ी संख्या बुंदेलखंडियों की ही है।
- योजनाओं की हकीकत:_ उन्होंने 'जल जीवन मिशन' जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि धरातल पर अब भी कई गांवों में पानी नहीं पहुंचा है और टंकियों के निर्माण में गुणवत्ता की कमी देखी जा रही है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों और मंत्रियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
"नेताओं का महिमामंडन छोड़ें, पाई-पाई का हिसाब मांगें"
जनता से लोकतांत्रिक जागरूकता का आह्वान करते हुए श्री राजपूत ने कहा कि अब समय आ गया है कि लोग मंत्रियों और नेताओं को गजरा पहनाना और उनके पीछे तालियां बजाना बंद करें। जनता को अपने लोकतांत्रिक अधिकारों रूपी 'तलवार' उठानी होगी और विकास के लिए आए सरकारी बजट के एक-एक पैसे का हिसाब मांगना होगा।
आगामी रणनीति और मुख्य मांगें
उन्होंने मांग रखी कि आगामी संसद सत्र में आने वाले परिसीमन में बुंदेलखंड को अलग किया जाए। बुंदेलखंड का अपना अलग कैडर हो, अपना हाईकोर्ट हो और यहां के 100% रोजगार पर स्थानीय युवाओं का अधिकार हो। उन्होंने सभी संगठनों से अपील की कि मुख्यमंत्री कोई भी बने, लेकिन पहला लक्ष्य केवल बुंदेलखंड राज्य का निर्माण होना चाहिए। जल्द ही पूरे क्षेत्र में 'बहुत सहा है, अब ना सहेंगे, बुंदेलखंड राज्य लेकर रहेंगे' के नारों वाले बैनर जन-सहयोग से गांव-गांव और चौराहों पर लगाए जाएंगे।
विभिन्न संगठनों और समाजसेवियों का मिला खुला समर्थन
इस अवसर पर बुंदेलखंड के अलग-अलग संगठनों ने एक सुर में मोर्चा का समर्थन किया। बुंदेलखंड राज्य निर्माण संघर्ष समिति के संयोजक रमेश चंद्र दुबे, बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के अध्यक्ष प्रवीण पांडेय, और बुंदेलखंड नव निर्माण सेवा के अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव ने एकजुट होकर संघर्ष की बात कही। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, बांदा ने भी अपना खुला समर्थन घोषित किया। महासभा के अध्यक्ष विजय निगम, दुर्गा चरण श्रीवास्तव, विशाल श्रीवास्तव, सिद्धार्थ सिंह, आलोक निगम, शैवाल भटनागर, और रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने इस मुहिम में हरसंभव साथ देने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में बुंदेलखंड के लिए 52 बार अपने खून से चिट्ठियां लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार व समाजसेवी ताराचंद्र पाटकर, पूर्व बार संघ अध्यक्ष आनंद सिन्हा, पूर्व बार संघ अध्यक्ष द्वारकेश यादव मंडेला, पूर्व अध्यक्ष रणवीर सिंह चौहान, अवधेश गुप्ता (खादी वाला), 'मुक्ति चक्र' के संपादक गोपाल गोयल, वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा, नाथ संप्रदाय के स्वामी विवेकानंद सरस्वती, महोबा प्रेस क्लब अध्यक्ष संजय मिश्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता राम लखन राजपूत, बार संघ के पूर्व महामंत्री मनोज निगम लाला, श्रीमती हेमलता और मुजीब आलम ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता रोहन सिन्हा ने किया।
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