प्रशिक्षण की प्रगति देखकर भावविभोर हो उठे संस्थान के निदेशक

उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति विभाग लखनऊ में लोक परंपरा आधारित प्राचीन विधाओं को पुनर्जीवित कर उनका प्रचार प्रसार करने...

Jun 9, 2026 - 11:12
Jun 9, 2026 - 11:13
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प्रशिक्षण की प्रगति देखकर भावविभोर हो उठे संस्थान के निदेशक

चित्रकूट। उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति विभाग लखनऊ में लोक परंपरा आधारित प्राचीन विधाओं को पुनर्जीवित कर उनका प्रचार प्रसार करने के लिए प्रदेश में विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रमों का अवलोकन करने अखिल भारतीय समाजसेवा संस्थान पहुंचे लोक एवं जनजातीय संस्कृति संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी ने यहां चल रहे अति प्राचीन कोल आदिवासी परंपरा कोलहाई, मुरेरवा, सजनई, बलमा टिप्पा और राई नृत्य प्रशिक्षण की प्रगति देखकर भावविभोर हो उठे। अति प्राचीन नृत्य कोलहाई, मुरेरवा, बलवा और सजनई विधा को देखकर प्रशिक्षार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक एकता और राष्ट्रीय एकता के लिए देश में ऐसे कार्यक्रम होना अति आवश्यक है। आदिवासी बालिकाओं की क्षमता और दक्षता को देखते हुए उन्होंने कहा की संस्कृति विभाग निरंतर आगे बढ़ाने के लिए भविष्य में सघन रूप से सहयोग करता रहेगा। 

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