दमोह में छात्रों की सुरक्षा भगवान भरोसे! प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर उठे सवाल
जिले के कई निजी शिक्षण संस्थानों में अग्निशामक यंत्र नहीं हैं, अधिकांश स्थानों पर केवल एक ही निकास द्वार है, कई संस्थान बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं, विद्युत तार खुले पड़े हैं...
दमोह से इम्तियाज़ चिश्ती...
लखनऊ अग्निकांड के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल
दमोह। लखनऊ में जून माह में हुए दर्दनाक कोचिंग अग्निकांड के बाद देशभर में शैक्षणिक संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क हुआ, लेकिन दमोह जिले में हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। शहर और जिले में संचालित कई निजी स्कूल, कोचिंग सेंटर और शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक व्यापक जांच या कार्रवाई नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार, जिले के कई निजी शिक्षण संस्थानों में अग्निशामक यंत्र नहीं हैं, अधिकांश स्थानों पर केवल एक ही निकास द्वार है, कई संस्थान बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं, विद्युत तार खुले पड़े हैं और पर्याप्त वेंटिलेशन की भी व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा पार्किंग और प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आग अथवा किसी अन्य आपदा की स्थिति में इन कमियों के कारण बड़ी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। दिल्ली और लखनऊ जैसे हादसे पहले ही सुरक्षा मानकों की अनदेखी के गंभीर परिणाम सामने ला चुके हैं, इसके बावजूद दमोह में प्रशासन की सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन संस्थानों की जांच कर आवश्यक सुधार नहीं कराए गए तो भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी की संभावना बनी रहेगी। लोगों ने जिला प्रशासन से सभी निजी शैक्षणिक संस्थानों की संयुक्त जांच कर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी सत्यम चौरसिया ने कहा, "अभी हमने यहां कार्यभार संभाला है और हमारे दो अधिकारी अवकाश पर हैं। फिर भी मैं इस पूरे मामले को संज्ञान में लेकर आवश्यक कार्रवाई कराऊंगा।"
प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर अब विद्यार्थियों, अभिभावकों और आम नागरिकों की नजरें टिकी हुई हैं। यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा और आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जाते हैं, तो भविष्य में संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
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