मातमी धुन के बीच कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किए गए ताजिया

जिले में मोहर्रम का पर्व गुरुवार को पूरी अकीदत, श्रद्धा और परंपरागत रस्मों के साथ मनाया गया। इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद...

Jun 27, 2026 - 10:41
Jun 27, 2026 - 10:42
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मातमी धुन के बीच कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किए गए ताजिया

मोहर्रम पर ताजिया जुलूस देखने को उमड़े लोग

चित्रकूट। जिले में मोहर्रम का पर्व गुरुवार को पूरी अकीदत, श्रद्धा और परंपरागत रस्मों के साथ मनाया गया। इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की याद में मनाए जाने वाले इस गम के त्योहार पर जिलेभर के कस्बों व गांवों में अलम और ताजियों के जुलूस निकाले गए। या हुसैन’ की सदाओं के बीच अकीदतमंदों ने मातम मनाया और शहीदों को खिराजे-अकीदत पेश की।

मोहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है और इसकी दसवीं तारीख, यौम-ए-आशूरा, कर्बला की जंग में हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद दिलाती है। परंपरा के मुताबिक, नौ और दस मोहर्रम को रोजे रखे जाते हैं, मजलिसें होती हैं और ताजिए ठंडे किए जाते हैं। इसी कड़ी में बुधवार रात कई स्थानों पर दहकते अंगारों पर चलने की रस्म भी अदा की गई, जिसमें अकीदतमंदों ने अपने जज्बे और आस्था का इजहार किया। गुरुवार देर शाम मुख्यालय के पुरानी बाजार में माहौल भावुक हो उठा। उतारखाना, तरौंहा और द्वारिकापुरी मोहल्लों के ताजियों का मिलन कराया गया। तीनों ओर से आए ताजियों के संगम को देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। डीएम और एसपी के निर्देश पर चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहा। संवेदनशील स्थानों पर पीएसी के साथ-साथ महिला पुलिस की भी तैनाती की गई। ड्रोन कैमरों से जुलूस की निगरानी होती रही। प्रशासन ने रूट डायवर्जन लागू कर यातायात को सुचारु बनाए रखा। ताजिया कमेटियों के पदाधिकारियों ने भी पुलिस-प्रशासन का सहयोग किया। जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। कहीं से भी कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। देर रात ताजियों को करबला में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।

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