गंभीर अपराध में आरोपी नेताओं को कोई पार्टी प्रत्याशी न बनाएं
जैसा कि सभी राजनीतिक दल वर्ष 1952 से वर्ष 1971 तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव में ऐसी नीति और रणनीति बनाते रहे हैं।

- एडीआर के सेमिनार में सर्वसम्मति से पारित हुए दो प्रस्ताव
आज स्थानीय राजकीय महिला महाविद्यालय सभागार बांदा में एडीआर यूपी इलेक्शन वॉच के संयुक्त तत्वाधान में प्राचार्य डॉ दीपाली गुप्ता की अध्यक्षता में हुए सेमिनार में जिले के 24 महाविद्यालयों से आए हुए शिक्षाविदों के सर्वसम्मति से चुनाव सुधार हेतु दो प्रस्ताव पारित हुए। इन प्रस्तावों में यह मांग की गई है कि आगामी विधानसभा चुनाव वर्ष 2022 में कोई भी राजनीतिक दल गंभीर अपराधों में आरोपी नेता को प्रत्याशी न बनाएं, जबकि दूसरे प्रस्ताव में सभी राजनीतिक दलों एवं चुनाव आयोग तथा सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई कि वह कुछ ऐसी व्यवस्था करें जिसमें प्रत्येक राजनीतिक दल में कर्मठ ईमानदार जुझारू किंतु गरीब व्यक्ति को भी टिकट मिल सके।
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जैसा कि सभी राजनीतिक दल वर्ष 1952 से वर्ष 1971 तक लोकसभा और विधानसभा चुनाव में ऐसी नीति और रणनीति बनाते रहे हैं। दोनों प्रस्तावों में बड़ी संख्या में मौजूद 24 महाविद्यालयों के 100 से अधिक शिक्षाविदों ने हाथ उठाकर दोनों प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पास किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं एडीआर यूपी इलेक्शन वॉच के प्रदेश कोऑर्डिनेटर अनिल शर्मा ने बताया कि एडीआर यानी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, पिछले लगभग दो दशकों से क्षेत्र में चुनाव सुधार के लिए कार्य कर रहा है। संस्था के संस्थापक व ट्रस्टी त्रिलोचन शास्त्री है जो आई आई एम बेंगलुरु के डीन रहे हैं। जबकि दूसरे ट्रस्टी जगदीश छोकर आईआईएम अहमदाबाद में डीन रहे हैं।
वर्तमान में एडीआर के हेड रिटायर्ड मेजर जनरल अनिल वर्मा है। एडीआर कि पूरे प्रदेश में जनपद बार इकाइयां सक्रिय हैं। एडीआर के साथ देश भर की 12 सौ से अधिक स्वयंसेवी संस्थाएं जुड़ी हुई है।
श्री शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को एवं सभी राजनीतिक दल के मुखियाओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं की एक तो वह किसी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को टिकट न दें। इसके बाद भी यदि टिकट दिया है वह राजनीतिक दल शपथ पत्र देकर चुनाव आयोग को यह बताएं कि इस गंभीर अपराध के आरोपी को टिकट देने के पीछे उसकी पार्टी की क्या मजबूरी रही है।
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श्री शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी राजनीतिक पार्टियों को पहले वर्ष 2019 में यह स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यदि वे किसी अपराध के आरोपी को टिकट देते हैं तो वे दो सबसे ज्यादा प्रसार संख्या वाले अखबारों तथा एक टीवी चौनल में उस प्रत्याशी के अपराधों के बारे में विस्तार से जानकारी को विज्ञापन के माध्यम से प्रकाशित करें ताकि जनता अपने प्रत्याशी को ठीक प्रकार से जान सके। सुप्रीम कोर्ट में वर्ष 2019 में राजनीतिक दलों द्वारा उनके आदेश का ठीक से पालन न करने पर नाराजगी जताते हुए आगामी वर्ष 2022 के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में गंभीर अपराधों के आरोपी प्रत्याशियों के बारे में उसकी गाइडलाइन का पालन करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
इस अवसर पर बुंदेलखंड के वरिष्ठ कवि व शिक्षाविद डॉक्टर चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ललित में आत्म चेतना के जगह बिना उद्धार नहीं होगा,् सच्चे लोकतंत्र की और बढ़ने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया। वही डॉक्टर सबीहा रहमानी ने अपनी लघु कथा ‘सच्चे सेवक’ के माध्यम से राजनीति में सेवा के बहाने माल कमाने वालों पर करारा तंग किया। वहीं साहित्यकार व प्राध्यापक डॉ शशि भूषण मिश्रा मैं गुड़गांव से पिता को साइकिल पर लेकर बिहार तक की ले जाने वाली लड़की की साची घटना को लड़का और लड़की का मिथक तोड़ने वाली रचना जिसे बहुत सराहा गया।
इस अवसर पर सीबीआई के पूर्व जज अवधेश नारायण द्विवेदी, प्राचार्य डॉ दीपाली गुप्ता, जयंती सिंह, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू, एडीआर के जिला संयोजक सचिन चतुर्वेदी, गोविंद दीक्षित, आदित्य प्रकाश मिश्रा, उमेश दत्त ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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कार्यक्रम की शुरुआत में ही महाविद्यालय की गैलरी में परमवीर चक्र विजेताओं को श्रृद्धासुमन अर्पित करते हुए देश के इन जांबाजों को स्मरण किया गया तथा कार्यक्रम के दौरान तमाम सवालों के जवाब मंच से अतिथियों ने दिए। सेमिनार की अध्यक्षता डॉ दीपाली गुप्ता ने तथा संचालन डॉ शशि भूषण मिश्रा ने किया।
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