भर्ती प्रक्रिया व वित्तीय अनियमिताओं में बीयू कुलपति कटघरे में

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार व वित्तीय अनियमिताओं के मामले में कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय...

भर्ती प्रक्रिया व वित्तीय अनियमिताओं में बीयू कुलपति कटघरे में

झांसी/बांदा। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार व वित्तीय अनियमिताओं के मामले में कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय, कुलसचिव और वित्त अधिकारी के खिलाफ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह आदेश हाई कोर्ट इलाहाबाद के न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति शैलेंद्र क्षितिज की खंडपीठ ने रसायन विभाग में कार्यरत सहायक प्रोफेसर और अपना दल (एस) की शिक्षक मंच की प्रदेश महासचिव रेखा लगराखा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है। याचिका में पूरे मामले की सीबीआई, ईडी या एसआईटी से जांच कराने की मांग की गई है।

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याची ने कुलपति और वित्त अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कहा कि कुलपति ने रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी और कुछ प्रोफेसरों के साथ मिलकर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कोष से 40 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है।वर्ष 2023 में हुए बीएड परीक्षा से धन एकत्र कर कुलपति और एक प्रोफेसर के निजी संयुक्त खाते में अवैध रूप से स्थानांतरित कर दिया गया था। इसके अलावा विश्वविद्यालय के आसपास विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए निविदा प्रक्रिया का पालन किए बगैर निविदाएं दी गई हैं। इससे 150 करोड़ के सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है।

याचिका के अनुसार बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में पिछले दो ढाई वर्षो में विकास कार्यों के नाम पर पानी की तरह पैसा बढ़ाया गया। वर्तमान कुलपति के संरक्षण में लगभग 200 करोड़ के ऊपर का व्यय किया जा चुका है। सारे नियमों को ताक पर रखकर समस्त कार्य मात्र वित्तीय एवं प्रशासनिक अनुमति से ही संपन्न करवा लिए गए हैं। हर काम जानबूझकर सरकारी एजेंसी को देकर सीधे-सीधे दोगुनी कीमत का भुगतान किया गया है और अतिरिक्त रकम घूसखोरों ने आपस में बंटवारा कर लिया है।

याचिका में कहा गया है कि विश्वविद्यालय में पहले से सभी भवनों में लोहे के फ्रेम पर पेंट से लिखे हुए बोर्ड लगे हुए थे। उन्हें साधारण पेंट द्वारा या रेडियम युक्त पेंट द्वारा सभी बोर्ड सही किया जा सकते थे। किंतु  1.26 करोड़ ग्लोशाइन बोर्ड पर व्यय किया गया। वह भी बिना किसी टेंडर के। इसी तरह कैफेटेरिया पर 1.16 करोड़ रूपया व्यय किया गया। जो बंद पड़ा हुआ है। 

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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक संस्थान है जहां शिक्षा और शिक्षा के साधन सर्वोपरि होना चाहिए न कि अनावश्यक भौतिक सुख सुविधाएं। एक तरफ तो कुलपति द्वारा भरी गर्मी में परीक्षा करवाने के लिए विद्यार्थियों को कूलर तक की व्यवस्था नहीं कराई गई। वहीं दूसरी ओर उनकी सुविधा के नाम पर कई करोड़ का निष्फल व्यय किया गया। स्पष्ट है कि यह सब कुछ सिर्फ वित्तीय अनियमितताओं के इरादे से किया गया।

याची के अधिवक्ता रोहन पांडेय ने दलील दी कि वित्तीय अनियमितताओं के अलावा विश्वविद्यालय में हो रही भर्तियों और पदोन्नति की प्रक्रिया में भी अनियमितताएं बरती जा रही हैं।

याची भी 21 वर्षों से सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। लेकिन उसे अबतक पदोन्नति नही दी गई। इन सभी अनियमितताओं की शिकायत राज्यपाल से की गई जिस पर जांच हुई लेकिन समिति ने जांच के नाम पर खानापूरी की।

इसके पहले मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने लगाए गए अरोपों की गंभीरता और याची की सद्भावना को सिद्ध करने के लिए याची को 50 हजार रुपये जमा करने का आदेश दिया था। जिसके अनुपालन में याची के रकम जमा कर दी। इसके बाद अदालत ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव व वित्त अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया हैं। जिन्हें नोटिस जारी की गई है, उनमें विश्वविद्यालय के कुलपति, कुल सचिव, वित्त अधिकारी प्रोफेसर डीके भट्ट, प्रोफेसर मुन्ना तिवारी और प्रोफेसर एसपी सिंह शामिल है। मामले की अगली सुनवाई 11जुलाई को होगी।

डॉ रेखा लगराखा ने बताया कि ये सिर्फ शिक्षक कर्मचारी की नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के वो अधिकार जो भ्रष्टाचारियों की वजह से उन्हें नहीं मिल पा रहे हैं, उसकी लडाई है। देश का भविष्य निर्धारित करने वाले विद्यार्थी- शिक्षक की लडाई है। किसी भी चीज की अति हमेशा विनाश का कारण रही है। डॉ रेखा का कहना है कि उनका मकसद शोषण के शिकार हो रहे सभी शिक्षक कर्मचारी और विद्यार्थियों को उनका अधिकार दिलाना है। उन्हें अपने देश के कानून और  ईश्वर पर पूरा विश्वास है न्याय जरुर मिलेगा।

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