बुन्देलखण्ड के लोग कुपोषण से बचने को, पोषक मोटे अनाज का उपयोग करें

बुन्देलखण्ड क्षेत्र कुपोषण से प्रभावित है, कुपोषण की समस्या से निजात पाने के लिये स्थानीय पोषक अनाज जैसे बाजरा, जौ, ज्वार, मोटे अनाज के उपयोग पर करना चाहिये..

Sep 17, 2021 - 08:19
Sep 17, 2021 - 08:22
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बुन्देलखण्ड के लोग कुपोषण से बचने को, पोषक मोटे अनाज का उपयोग करें
बांदा कृषि विश्वविद्यालय (banda agriculture university)

अर्न्तराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 के परिपेक्ष्य कृषि वैज्ञनिकों ने दी सलाह

बुन्देलखण्ड क्षेत्र कुपोषण से प्रभावित है, कुपोषण की समस्या से निजात पाने के लिये स्थानीय पोषक अनाज जैसे बाजरा, जौ, ज्वार, मोटे अनाज के उपयोग पर करना चाहिये। 

यह बात कृषि वैज्ञनिकों ने अर्न्तराष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 के परिपेक्ष्य में कृषि विज्ञान केन्द्र, बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा एवं इफको के संयुक्त तत्वाधान में शुक्रवार को पोषण वाटिका महाभियान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान कही। आयोजन उद्यान महाविद्यालय के कान्फ्रेन्स हॉल में किया गया। जिसका उद्देश्य कृषकों, महिला कृषकों/कन्याओं को पोषक अनाजों व टिकाऊ खेती के प्रति जागरूक करना था।

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विश्वविद्यालय के सह निदेशक प्रसार डा. नरेन्द्र सिंह ने कुपोषण की समस्या से निजात पाने के लिये स्थानीय पोषक अनाज जैसे बाजरा, जौ, ज्वार, मोटे अनाज के उपयोग पर जोर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  जिला पंचायत अध्यक्ष  सुनील सिंह पटेल ने अपने उद्बोधन में बुन्देलखण्ड की पुरानी संस्कृति, परम्परागत भोज्य पदार्थां को सजोंकर रखने के लिये सभी का आवाह्न किया साथ ही मोटे अनाज, चना एवं गेंहू का आटा, कठिया गेंहू आदि का सेवन करने के लिये प्रेरित किया। बलराम कछवाह सदस्य, प्रबन्ध समिति अटारी, कानपुर ने पोषक अनाजों के उत्पादन को बढ़ाने के लिये सभी कृषकों को प्रेरित किया और कहा कि इससे दुगना लाभ होगा ।

बांदा कृषि विश्वविद्यालय (banda agriculture university)

कार्यक्रम के अध्यक्ष डा. यू.एस. गौतम, कुलपति  बाँदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बाँदा ने कहा कि बुन्देलखण्ड में नवयुवकों एवं नवयुवतियों में खून की कमी की विकट समस्या है इसके समाधान को दैनिक आहार में गुड, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, करौंदा, चुकन्दर, को शामिल करे। उन्होंने कहा कि मिलावटखोरी की वजह से पोषण युक्त अनाज, सब्जी दूध आदि प्राप्त नही हो पाती है इसलिये हमें अपने घर पर ही सब्जी उगाकर परिवार के पोषण का ध्यान रखना चाहिये। 

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उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की आगामी कार्ययोजना में स्टार्टअप इंण्डिया के अन्तर्गत स्वयं सहायता समूह, कृषक उत्पादक संगठन को जोड़कर मोटै अनाजों का उत्पादन, प्रसंसकरण एवं विपरण कराने की योजना है। उन्होंने  कार्यक्रम में उपस्थित छात्राओं से आवाह्न किया कि वे उच्च शिक्षा के लिये कृषि में स्नातक करें। 

बांदा कृषि विश्वविद्यालय (banda agriculture university)

इस कार्यक्रम में चार तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया जिसमें डा. सौरभ, ने मानव स्वास्थ्य में पौष्टिक खाद्यान की भूमिका व महत्व, डा. भालेन्द्र सिंह राजपूत, टिकाऊ खेती हेतु वृक्षारोपण की भूमिका, डा. दीप्ती भार्गव, महिला अध्ययन केन्द्र का परिचय एवं डा. जी.एस. पवार, मोटे अनाजों का महत्व एवं उपयोगिता के विषय पर विस्तृत चर्चा की।  डा. श्याम सिंह, अध्यक्ष कृषि विज्ञान केन्द्र बाँदा ने सभी का स्वागत किया।

केन्द्र की वैज्ञानिक डा. प्रज्ञा ओझा ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य से सभी को अवगत कराया। मोटे अनाज को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में बढ़ावा देने के उद्देश्य से केवीके, बाँदा द्वारा बाजरे का मूल्यवर्धन व प्रसंस्करण कर लड्उू तैयार किये गये जिसका विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रतिभागियों को पोषण वाटिका किट, जामुन, नीबू एवं करौंदे की 1000 पौध का वितरण भी किया गया।  इस कार्यक्रम में 40 कृषक 50 महिला कृषकों एवं 75 कन्याओं समेंत कुल 200 लोगों ने भाग लिया।

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