मॉडल गाँव, खुशहाली और समृद्धता का पैगाम
भारत एक कृषि प्रधान देश है, देश की अधिकतर आबादी गाँव में रहती है। हालांकि शहरीकरण के इस दौर में बहुत ही कम गाँव ऐसे बचे है..

भारत एक कृषि प्रधान देश है, देश की अधिकतर आबादी गाँव में रहती है। हालांकि शहरीकरण के इस दौर में बहुत ही कम गाँव ऐसे बचे है जिनपर शहरी रहन सहन का असर न हुआ हो। लेकिन आज भी गाँव, शहर की इस भागदौड़ से दूर है। अगर बात करें भारत में गाँव की उपयोगिता की तो 136 करोड़ आबादी की ओर बढ़ चुके भारत में 70 प्रतिशत आबादी गांव में ही रहती है, ऐसे में शहरों के साथ गाँवों का विकास होना अनिवार्य हो जाता है।भारत की असल आत्मा गांव में बसती है।
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मॉडल गांव को ग्रामीण परम्पराओं से ओत प्रोत बहुमूल्य कौशल कहा जा सकता है जो गांधी के ग्राम स्वराज्य और पुरा भारत के विचारों से प्रेरित है। उक्त मॉडल का उद्देश्य है, अल्पविकसित ग्राम को विकसित गांव में तब्दील करना। इस स्वप्न को संजोते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी, बाँदा(उ.प्र) हीरालाल ने 31 अगस्त, 2018 को इसकी नींव रखी। तब से लेकर अब तक न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देशभर के गांव इस नीति से लाभान्वित हो रहे हैं।
यह कार्यक्रम ग्रामीणों के उस अमूल्य लर्निंग टूल की भांति प्रस्तुत हुआ है, जिसकी मदद से राष्ट्र के बहुमुखी विकास का रास्ता सुगम पाया है। प्रारम्भ में कुछ चयनित गाँव से एक टीम बना कर रालेगण (महराष्ट्र) भेजी गयी। वहाँ जाकर उस टीम ने सिद्धि(अन्ना हजारे का आदर्श गांव) और हिवड़े बाजार (पदम् श्री पोपट राव का आदर्श गांव) के चेंजमेकर्स ने मुलाकात की और वैज्ञानिक कृषि-कौशल हासिल किया, जिसके बलबूते सुव्यवस्थित ढंग से अनेक अन्न-भंडारण गृहों की स्थापना भी की गयी।
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साथ ही सदस्यों के साथ परामर्श और चर्चा शुरू की गयी। विभिन्न जिलों में स्वयंसेवकों की पहचान की गयी जो कार्यक्रम के अनुरूप जागरूकता फैलाने में मदद कर सकते थे। तदोपरांत मॉडल गांव, पूरे उत्तर प्रदेश में लगभग 800$ एफपीओ के डेटाबेस को एकत्रित करने में सक्षम हुआ। उन सभी के लिए नियमित आधार पर वेबिनार/क्षमता निर्माण पहल आयोजित की गयीं।। इससे पहले वे 800$ में से, 18 और फिर 41 एफपीसी को शॉर्टलिस्ट करने में ही सक्षम थे।
अब तक भारत के 24 राज्यों एवं विश्व के अन्य कुल 3 देशों के 4641 लोग इस मिशन से जुड़ चुके हैं एवं 3366 लोग अपने गांव में बुनियादी परिवर्तन के लिए मॉडल गांव की तर्ज पर मेनिफेस्टो भी बना चुके हैं। देश के 24 राज्यों में से सर्वाधिक उत्तर प्रदेश के 4094 लोग मॉडल गांव से जुड़े हैं और इनमें से 2838 लोग मेनिफेस्टो भी बना चुके हैं।
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इसके अलावा बिहार में 286, झारखंड में 84, मध्य प्रदेश में 45 लोगों ने पंजीकरण कराया है। इसी तरह भारत से बाहर बंग्लादेश, इंग्लैंड और मिगौरी के लोगों ने मॉडल गांव में रूचि ली और अपने ग्रामीण क्षेत्र के बदलाव के लिए पंजीकरण कराया है।
प्रदेश में सर्वाधिक पंजीकरण 498 बाँदा में मॉडल गांव की प्रशंसा करते हुए डॉ. राजीव कुमार (नीति आयोग के उपाध्यक्ष) ने आई.ए.एस हीरालाल के प्रति ससम्मान ट्वीट किया है, वहीं इस नीति को अवार्ड ऑफ एक्सीलेंस, भारत गौरव पुरुस्कार और गांधी पीस फाउंडेशन, नेपाल द्वारा उत्कृष्टता से नवाज़ा गया है।
मॉडल गांव वेबसाइट पर जाएँ : https://modelgaon.org/en/
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@heeralalias @GaonModel pic.twitter.com/81yswWLTkV — Dr. Heera Lal IAS advisor Model Gaon (@heeralalias) December 21, 2021
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