क्या इस बार शुरू हो जाएगा उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड का पहला नेत्र बैंक?
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड का पहला नेत्र बैंक बनने की उम्मीद एक बार फिर जग गई है...

मेडिकल कॉलेज ने फिर भेजा प्रस्ताव
झांसी। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड का पहला नेत्र बैंक बनने की उम्मीद एक बार फिर जग गई है, लेकिन इस बार भी सवाल वही है—क्या यह योजना हकीकत बनेगी या सिर्फ एक और प्रस्ताव बनकर रह जाएगी? महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज ने एक बार फिर नेत्र बैंक बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। सालों से इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर चर्चा हो रही है, पर अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।
गौरतलब है कि नेत्र बैंक का उद्देश्य दान की गई आंखों को एकत्रित कर, उनका मूल्यांकन कर कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए उपयोग करना है। इससे दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई रोशनी मिल सकती है। लेकिन अब तक, इस महत्वपूर्ण पहल में कई बार अवरोध आए हैं। उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड में कई लोग नेत्रदान के लिए तैयार हैं, पर नेत्र बैंक की कमी के कारण उनकी यह मंशा पूरी नहीं हो पा रही है।
मेडिकल कॉलेज में 500 बेड का अस्पताल बनकर तैयार है, और इस बार नेत्र बैंक की स्थापना की उम्मीद की जा रही है। चिकित्सकों ने प्रस्ताव भेज दिया है, लेकिन पहले की तरह इस बार भी योजना को हकीकत में बदलने में चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
जबकि उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड का पहला नेत्र बैंक अभी भी सिर्फ कागजों में है, वहीं मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड के सदगुरू नेत्र चिकित्सालय ने डॉ. बी. के. जैन व डॉ. ईलेश जैन के निर्देशन में अपने नेत्रदान कार्यक्रम के तहत शानदार सफलता हासिल की है। आपको बता दे कि 2007 में स्थापित मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड के सदगुरू नेत्र चिकित्सालय आई बैंक के तहत अब तक 7,000 से अधिक नेत्रदान हो चुके हैं।
इस समाचार में झांसी की नेत्र बैंक परियोजना की देरी और चित्रकूट के सदगुरू नेत्र चिकित्सालय की सफलता को एक साथ दिखाया गया है। जहाँ एक ओर नेत्र बैंक की योजना कागजों में अटकी हुई है, वहीं दूसरी ओर सदगुरू नेत्र चिकित्सालय नेत्रदान के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है।
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